Poems from Punjab

इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत, गुम है, गुम है, गुम है।
“A girl whose name is love, is missing, is missing, is missing”
Shiv Kumar Batalvi ((23 July 1936 – 7 May 1973)
A famous Punjabi language poet with a folk consciousness and modern sensibility, Shiv Kumar excelled with a freshness of vocabulary, diction, imagery and rhythmic flow of words which remain unparalleled in Punjabi poetry. Shiv was born in a village near Sialkot (Pakistan). His family moved to Batala, Gurdaspur (India) after Indian partition in 1947. The pangs of this separation are recurrent themes of this great poet of the land. One of my current favorites composed by Shiv Kumar Batalvi is ”ik kudi jida naam mohabbat, gum hai gum hai” sung by Shahid Mallya in his beautiful voice. From the soundtrack of Udta Punjab (2016)

कुछ बोध कथाएँ

अपनी झोली

Group_of_Thugs

दो आदमी यात्रा पर निकले। दोनों की मुलाकात हुई। दोनों यात्रा में एक साथ जाने लगे। दस दिनों के बाद दोनों के अलग होने का समय आया तो एक ने कहा, ‘भाईसाहब! एक दस दिनों तक हम दोनों साथ रहे। क्या आपने मुझे पहचाना?’ दूसरे ने कहा, ‘नहीं, मैंने तो नहीं पहचाना।’ वह बोला, ‘माफ़ करें मैं एक नामी ठग हूं। लेकिन आप तो महाठग हैं। आप मेरे भी उस्ताद निकले।’

‘कैसे?’ ‘कुछ पाने की आशा में मैंने निरंतर दस दिनों तक आपकी तलाशी ली, मुझे कुछ भी नहीं मिला। इतनी बड़ी यात्रा पर निकले हैं तो क्या आपके पास कुछ भी नहीं है? आप बिल्कुल ख़ाली हाथ हैं?’

‘नहीं, मेरे पास एक बहुत क़ीमती हीरा है और एक सोने का कंगन है ।’

‘तो फिर इतनी कोशिश के बावजूद वह मुझे मिले क्यों नहीं?’

‘बहुत सीधा और सरल उपाय मैंने काम में लिया। मैं जब भी बाहर जाता, वह हीरा और सोने का कंगन तुम्हारी पोटली में रख देता था। तुम सात दिनों तक मेरी झोली टटोलते रहे। अपनी पोटली संभालने की जरूरत ही नहीं समझी। तुम्हें मिलता कहाँ से?’

कहने का मतलब यह कि हम अपनी गठरी संभालने की ज़रूरत नहीं समझते। हमारी निगाह तो दूसरों की झोली पर रहती है। यही हमारी सबसे बड़ी समस्या है। अपनी गठरी टटोलें, अपने आप पर दृष्टिपात करें तो अपनी कमी समझ में आ जाएगी।

 सीमा

Old Woman India

सड़क किनारे एक बुढ़िया अपना ढाबा चलाती थी। एक यात्री आया। दिन भर का थका, उसने विश्राम करने की सोची। बुढिया से कहा, ‘क्या रात के लिए यहाँ आश्रय मिल सकेगा?’ बुढिया ने कहा, क्यों नहीं, आराम से यहां रात भर सो सकते हो।’

यात्री ने पास में पड़ी चारपाइयों की ओर संकेत कर कहा, ‘इस पर सोने का क्या चार्ज लगेगा?’ बुढ़िया ने कहा, ‘चारपाई पर सोने के लिए दस रूपए लगेंगे।’ यात्री ने सोचा रात भर की ही तो बात है। बेकार में दस रूपए क्यों खर्च की जाए। आंगन में काफी जगह है, वहीं सो जाऊंगा।

यह सोचकर उसने फिर कहा, ‘और अगर चारपाई पर न सोकर आंगन की ज़मीन पर ही रात काट लूँ तो क्या लगेगा?’ ‘फिर पूरे सौ रूपए लगेंगे -‘ बुढ़िया ने कहा।

बुढ़िया की बात सुन यात्री को उसके दिमाग पर संदेह हुआ। चारपाई पर सोने के दस रूपए और भूमि पर चादर बिछाकर सोने के लिए सौ रूपए – यह तो बड़ी विचित्र बात है। उसने बुढिया से पूछा, ‘ ऐसा क्यों?’

बुढ़िया ने कहा, ‘चारपाई की सीमा है। तीन फुट चौड़ी, छह फुट लंबी जगह ही घेरोगे। बिना चारपाई सोओगे तो पता नहीं कितनी जगह घेर लो।’ सीमा में रहना ही ठीक है। असीम की बात समस्या पैदा करती है।

भारतीय नरक

indian hell

एक बार एक भारतीय व्यक्ति मरकर नरक में पहुँचा,
तो वहाँ उसने देखा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी देश के नरक में जाने की छूट है ।
उसने सोचा, चलो अमेरिकावासियों के नरक में जाकर देखें, जब वह वहाँ पहुँचा तो द्वार पर पहरेदार से उसने पूछा – क्यों भाई अमेरिकी नरक में क्या- क्या होता है ? पहरेदार बोला – कुछ खास नहीं, सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक चेयर पर एक घंटा बैठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे लिटाया जायेगा, उसके बाद एक यमदूत आकर आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोड़े बरसायेगा…
बस! यह सुनकर वह व्यक्ति बहुत घबराया औरउसने रूस के नरक की ओर रुख किया, और वहाँ के पहरेदार से भी वही पूछा, रूस के पहरेदार ने भी लगभग वही वाकया सुनाया जो वह अमेरिका के नरक में सुनकर आया था । फ़िर वह व्यक्ति एक- एक करके सभी देशों के नर्कों के दरवाजे जाकर आया, सभी जगह उसे एक से बढकर एक भयानक किस्से सुनने को मिले । अन्त में थक- हार कर जब वह एक जगह पहुँचा, देखा तो दरवाजे पर लिखा था “भारतीय नरक” और उस दरवाजे के बाहर उस नरक में जाने के लिये लम्बी लाईन लगी थी, लोग भारतीय नरक में जाने को उतावले हो रहे थे, उसने सोचा कि जरूर यहाँ सजा कम मिलती होगी…
तत्काल उसने पहरेदार से पूछा कि यहाँ के नरक में सजा की क्या व्यवस्था है ? पहरेदार ने कहा – कुछ खास नहीं…सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक चेयर पर एकघंटा बैठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे लिटाया जायेगा, उसके बाद एक यमदूत आकर आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोड़े बरसायेगा… बस !

चकराये हुए व्यक्ति ने उससे पूछा – यही सब तो बाकी देशों के नरक में भी हो रहा है, फ़िर यहाँ इतनी भीड क्यों है ? पहरेदार बोला – इलेक्ट्रिक चेयर तो वही है, लेकिन बिजली नहीं है, कीलों वाले बिस्तर में से कीलें कोई निकाल ले गया है, और कोड़े मारने वाला यमदूत सरकारी कर्मचारी है, आता है, दस्तखत करता है और चाय-नाश्ता करने चला जाता है…औरकभी गलती से जल्दी वापस आ भी गया तो एक-दो कोड़े मारता है और पचास लिख देता है…चलो आ जाओ अन्दर !!

 

Survival Phrases in Telugu Language

telugu

[This article is copyrighted, please mention author’s name A. Avtans and article’s name when you are copying/referring content from this page]

Hyderabad is a melting pot of cultures. Since Hyderabad was ruled by Nizams for a long time, the native language here was originally Dakhini / Urdu. Today there are four major languages spoken in Hyderabad –  Telugu, Urdu, Hindi & English.

Telugu is a Dravidian language native to India. It stands alongside Hindi, English and Bengali as one of the few languages that predominate in more than one Indian state; it is the primary language in the states of Andhra Pradesh and Telangana. It is one of six languages designated as a classical language of India by the Government of India. Telugu is written in Telugu script [ Telugu lipi in Telugu].

ST Graphics -new Andhra Pradesh capital

Some common phrases in Telugu are given below :

English – Hindi – Telugu ( in Roman and Devanagari Script)

English – Hindi – Telugu ( in Roman and Devanagari Script)

Some Common Phrases

English Hindi Hindi in Roman Telugu (in Devanagari) Telugu (in script) Telugu in Roman
Hello नमस्ते namaste नमस्ते / नमस्कारम నమస్తే / నమస్కారం namaste / namaskaaram
Good अच्छा achchha मेलू మేలు meloo
Thanks धन्यवाद / शुक्रिया dhanyavaad / shukriya दन्यवादालु ధన్యవాదాలు danyavaadaalu
Excuse me माफ़ कीजिए maaf keejie नन्नु क्षमीणचंडी క్షమించండి nannu kshameenachandi
I am fine मैं ठीक हूँ। main theek hooein. नेनु बागुन्नानु నేను బాగున్నాను nenu baagunnaanu
And you? और आप? Aur aap? मारि मीरु? మరియు మీరు maari meeru
What is your name? आपका नाम क्या है? Aapaka naam kya hai? मी पेरू एमिटी? నీ పేరు ఏమిటి ? mi peroo emiti?
My name is Lucas. मेरा नाम लुकास है। mera naam lukaas hai. ना पेरु लुकास నా పేరు లుకాస్ na peru lukaas
I am from Holland मैं हॉलैंड से हूँ। main haulaind se hooein. नेनु हौलैंड नुंडी वच्चावु నేను హాలండ్ నుండి వచ్చి nenu haulaind nundi vachchaavu
I don’t  speak Telugu. मैं तेलुगु नहीं बोलता / बोलती। main telugu naheen bolata / bolati. नेनु तेलुगु माटलाडनु నేను తెలుగు మాట్లాడుతారు nenu telugu maatalaadanu
Where are you from? आप कहाँ से हैं? Aap kahaan se hain? मीरू एक्कड़ा नुंची वच्चावु। మీరు ఎక్కడ నుంచి వచ్చావు meeroo ekkarha nunchi vachchaavu.
Who are you? आप कौन हैं? Aap kaun hain? नुव्वू यवरु నువ్వు ఎవరు nuvvoo yavaru
Nice to meet you. आपसे मिलकर अच्छा लगा aapase milakar achchha laga मिम्मलिनी कलावटम संतोषमुगा उंडी మిమ్మల్ని కలవటం సంతోషముగా ఉంది mimmalini kalaavatam santoshamuga undi
Please come आइए aaie रंडी రండి randi
Please go जाइए jaaie वेल्लंडी వెళ్ళండి vellandi
Please sit बैठिए baithie कुरचंडी కూర్చోండి kurachandi
Please give दीजिए deejie इवंडी ఇవ్వాడి ivandi
Please stop ठहरिए thaharie आगंडी ఆగండి aagandi
It’s Good / okay. अच्छा / ठीक है। achchha / theek hai. मंची మంచి manchi
How much is this? यह कितने का है? Yah kitane ka hai? इदि इन्ता ఇది ఎంత ? idi inta
This is a dog. यह कुत्ता है। yah kutta hai. इदि कुक्क ఇది కుక్క idi kukk
How much is that? वह कितने का है? Vah kitane ka hai? अदि इन्ता ఎంత? Adi intaa
I need ………. मुझे …….चाहिए mujhe …….chaahie नाकु कावालि …… నాకు కావాలి naaku kaavaali …..
I don’t want anything मुझे कुछ नहीं चाहिए। mujhe kuchh naheen chaahie नाकु एमि वद्‍दु నాకు ఏమివద్దు naaku emi vad‍du
See you later फिर मिलेंगे phir milenge वेल्लीरेंडी / वेल्लीवस्तानु లోపలికి రండి velleerendi / velleevastaanu
Please come inside अंदर आइए andar aaie लोपलिकीरंडी ధన్యవాదాలు lopalikeerandi
Happy Birthday जन्मदिन की शुभकामनाएँ janmadin ki shubhakaamanaaeein पुत्तिनरोजु शुभाकांक्षलू పుట్టిన రోజు శుభాకాంక్షలు puttinaroju shubhaakaankshaloo
I will call the police मैं पुलिस बुलाऊँगी main pulis bulaaooeingi नेनु पुलिस नि पिलुस्तानु నేను పోలీసు చేస్తుంది nenu pulis ni pilustaanu
Stop! Thief! रोको, चोर roko, chora अपंडी, डोंगा దొంగ ఆపడానికి apandi, donga

Some Basic Vocabulary

Yes जी हाँ ji haan अवनु అవును avanu
No जी नहीं ji naheen कादु కాదు kaadu
There वहाँ vahaan अक्कड़ा అక్కడ akkarha
Here यहाँ yahaan इक्कड़ा ఇక్కడ ikkarha
Where कहाँ kahaan एक्कड़ा ఎక్కడ ekkarha
When कब kab यप्पड़ु ఎప్పుడు yapparhu
Who कौन kaun यवरु ఎవరు yavaru
What क्या kya यमी ఏమి yami

 

Some Food Related Vocabulary

English Hindi Hindi in Roman Telugu (in Devanagari) Telugu (in script) Telugu in Roman
Meat मांस / गोश्त maans / gosht मांसमु మాంసము maansmu
Drinking  Water पीने का पानी peene ka paani मंची नीरू (good water) మంచి నీరు manchi neeroo (good water)
Meal खाना khaana भोजनम భోజనం bhojanam
Milk दूध doodh पालू పాల paaloo
Yoghurt दही dahii पेरुगु పెరుగు perugu
Butter milk मट्ठा mattha मज्जिग మజ్జిగ majjiga
Lentils दाल daal पप्पु పప్పు pappu
Cooked rice भात bhaat अन्नमु అన్నం annamu
Salt नमक namak उप्पु ఉప్పు uppu
Sugar चीनी / शक्कर chiinii / shakkar चक्केर చక్కెర cakkera
Oil तेल tel नुने నూనె nune
Sauce / chutney चटनी chatanii पच्चड़ी పచ్చడి pacchadii
Tomato टमाटर tamaatar टमोटा టమోటా tamota
Vegetable Curry सब्ज़ी / तरकारी sabzii / tarkaarii कूर కూర koora
Vada वड़ा Vada गारेलु గారెలు gaarelu

Numbers : 1 to 10

one एक ek ओकटी ఒకటి okati
two दो do रेन्डु రెండు rendu
three तीन teen मूडु మూడు moodu
four चार chaar नालुगु నాలుగు naalugu
five पाँच paanch आइदु అయిదు aaidu
six छह chhah आरु ఆరు aaru
seven सात saat येडु ఏడు yedu
eight आठ aath येनिमिदि ఎనిమిది yenimidi
nine नौ nau तोम्मिदि తొమ్మిది tommidi
ten दस das पदि పది padi

  Abhishek Avtans

ताजदार-ए-हरम

sabri

भारत और पाकिस्तान के बहुत सारे लोगों के दिलों में अगर कोई क़व्वाली बहुत ख़ास जगह रखती है, तो वह ताजदार-ए-हरम  है। ताज़दार-ए-हरम को लिखने वाले थे जनाब ‘पुरनम इलाहाबादी’ (उर्फ़ ‘मुहम्मद मूसा’) और इसे पहली बार पाकिस्तान के मशहूर कव्वाली गायक ‘साबरी भाइयों‘ ने 1990 में गाया था।  काफ़ी अरसे पहले मैंने इस क़व्वाली को पहली बार हमारे पारिवारिक दर्ज़ी अब्दुल चाचा की दुकान पर सुना था। 2015 में कोक स्टूडियो के सीज़न 8 में इसे बड़ी शिद्दत से  आतिफ़ असलम ने फिर से गाया है। ताजदार-ए-हरम  एक नातिया कलाम है जिसमें भरपूर आस्था और मुहब्बत के साथ परमेश्वर को याद किया गया है। एक बेहतरीन इस्लामी भक्ति गीत। लेखक बार-बार यही कह रहा है कि हे परमेश्वर अपनी दया दृष्टि मुझ पर डालिए, आपके दरवाज़े से कोई ख़ाली नहीं जाता।

पवित्र शहर मदीना (सऊदी अरब) के लिए लेखक की भक्ति आत्मसात कर देने वाली है (क्या कहेगा जहाँ, आपके दर से अगर ख़ाली जाएँगे?) 

यह कहना लाज़िमी होगा कि यह कलाम भारत-पाकिस्तान की साझी संस्कृति की एक अमूल्य विरासत है।

इस नातिया कलाम के शुरूवाती बोल हैं – 

 

क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे 
डूबे ना कभी मेरा सफ़ीना लिख दे 
जन्नत भी गवारा है मगर मेरे लिए

ए क़ातिब-ए-तक़दीर मदीना लिख दे 
ताजदार-ए-हरम हो निगाह-ए-करम 
हम ग़रीबों के दिन भी सँवर जायेंगे 
हामीं-ए बेकसाँ क्या कहेगा जहाँ
आपके दर से ख़ाली अगर जायेंगे

ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम

कोई अपना नहीं ग़म के मारे हैं हम

आपके दर पर फ़रयाद लाये हैं
हो निगाहे-ए-करम, वरना चौखट पे

हम आपका नाम ले-ले मर जाएँगे।

ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम

 

Romanized with English translation

Kismat me meri chain se jeena likhde
Let a life of peace and contentment be my fate

Doobe nah kabhi mera safeenah likh de
May my ship never sink even in troubled waters – let this be my fate

Jannat bhi gawarah hai magar mere liye
It’s not that heaven would not be acceptable to me, but

Ae kaatib-e taqdeer madina likh de
O write of destiny, let Madina (City to which Prophet Mohammad came from Mecca, PBUH) be my fate

Tajdar-e-haram, ho nigaah-e-karam
O king of the holy sanctuary, bless us with your merciful gaze

Hum ghareebon ke din bhi sanwarjayenge
So that our days of woe may turn for the better

Haami-e-be-kasaan kya kahega jahan
O patron of the poor, what would the world say

Aapke darr se khaali agar jayenge
If we return empty-handed from your door?

Tajdar-e-haram Tajdar-e-haram
O king of the holy sanctuary

Koi apna nahi gham ke maaray hain hum
We have no one to call our own, we are stricken with greif

Aapke darr pe faryaad laaye hain hum
We come and cry for justice at your door

Ho Nigah-e-karam, warna chokhat pe hum
Please spare us a merciful glance, or we will

Aapka naam le le ke marjayenge
Die at your threshold, crying your name

Tajdar-e-haram Tajdar-e-haram
O king of the holy sanctuary

आतिफ़ असलम की आवाज़ में

 

साबरी भाईयों की आवाज़ में

Six Acres and a Third: The Classic Nineteenth-Century Novel about Colonial India

Six Acres & a third

For the last 10 days or so, I have been reading a eloquently written & humorous novel named ‘Six Acres and a Third‘ by Fakir Mohan Senapati (1843-1918).This novel was written by Senapati in the 19th century in Oriya language. I should frankly accept that I had never read anything long (except some short stories) in original or translated from Oriya language literature before I chanced upon this book in the Leiden University’s library. So this is my first experience of any Oriya prose. The novel was originally named ଛ ମାଣ ଆଠ ଗୁଣ୍ଠ [‘Chha Maana Atha Guntha’] and its English translation is published by University of California Press in the year 2005.

Fakir Mohan Senapati

While reading this book, I also came to know that Fakir Mohan Senapati is largely regarded as the father of Oriya nationalism and modern Oriya literature. Set in the villages of 1830’s Odisha, the novel talks about the story of common people and their evil landlord, Ramachandra Mangaraj. The story is written from the eyes of someone who lived and experienced all of these from the ground. The story tells you how poor peasants are cleverly exploited by the landlord and how different communities survive this exploitation. What was puzzling to me is the fact that even in early 19th Century, the petty officers in Police were as much corrupt as we find them nowadays. Another point of interest for me (languages wise) is when the narrator talks about one Zamindar Sheikh Dildar Mian:

Sheikh Karamat Ali used to live in Ara district, and had now moved to Midnapore. Everyone called him Ali Mian, or Mian for short; we will do the same. Ali Mian began his career as a horse trader. He would purchase horses at the west Harihar Chhatar fair and sell them in Bengal and Orissa. Once he sold a horse to the district magistrate of Midanapore. The Sahib was very pleased with it and condescended to inquire about Mian’s business and income. When Mian told him there was not much profit in horse trading, the Sahib, wanting to offer him a job, asked if knew how to read and write. Mian replied,  Huzoor, I know Persia. If you would kindly give me pen and paper, I could show you I can write my full name.

In the past, the Persian language had been held in high favor; it was the language of the court. With a sharp and pitiless pen, God has inscribed a strange fate for India; yesterday the language of the court was Persia, today it is English. Only he knows which language will follow tomorrow. Whichever it may be, we know for certain that Sanskrit lies crushed beneath a rock for ever. English pundits say, ‘Sanskrit is a dead language’.We would go even further , ‘Sanskrit is a language of half dead’.

Few Oriya words/facts I learned from this book are:

Debottara: Land given free of rent to defray the cost of worshiping a deity

Kanugoi: a subordinate revenue officer

Bharanas : a local measure of grains in Odisha

Kahali : a clay pipe

Khai: fried paddy

Ukhuda: fried paddy coated with jaggery

Bauri : an ex-untouchable caste of Odisha, immortalized by one Bauri named Muli by James M Freeman’s Untouchable: An Indian Life History 

Pana: an ex-untouchable caste of Odisha, There are six sub-castes viz-Buna, Ganda,Patra, Sonai, Samal and Jena of Panas.

Khandayats: Khandayats are the martial castes of Orissa

 

The book is also interlaced with several Sanskrit verses and they are beautifully translated as well:

This one is from Guru Gita

Guru-Gita

He who applies the balm of knowledge.

And opens our eyes blinded by the disease of ignorance,

To a guru like him, we bow.

 

Maun Vrata

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Soon after watching ‘Ankhon Dekhi‘ a 2014 Hindi language film by Rajat Kapur, I was reminded of an incident which happened around 12-13 years ago during my hostel life in JNU (Delhi, India). There was one co-resident of our hostel who suddenly decided one day, that he would be silent for the whole day once in a week. During this time, he would neither speak nor listen to anybody. If needed he would convey his messages in writing. At that time I found this as a very strange behavior, and laughed at the prospect of being silent for such a long time. But Now when I think of this whole episode, I find the practice of being silent quite an enchanting way to achieve peace and self-understanding. We are so much full of noise and voices – inner as well as outer. Silence is valued very highly in the Indian traditions. Indian religious doctrines talk of a maun vrata (मौन व्रत literally ‘obligation of silence’) which was practiced by ascetics and monks of Hindu-Jain-Buddhist and Sufi traditions. It is said that silence helps one to control one’s voice. And a clear conscience helps us to resolve our problems ourselves. Silence (maun मौन) gives shelter to speech (vani वाणी) as the nest gives it to a bird. One can express much more with silence than by speaking. There is a famous Arabic proverb which says – on the tree of silence grows the fruits of peace. There is one Buddhist tale from the life of king of Magadha empire Ajatshatru about the significance of silence. The story goes on like this –

Near the capital of Ajatshatru’s empire, Gautam Buddha was meditating with his 1000 disciples in a Mango grove in Rajagraha (current days Bihar). At the same time Ajatshatru was not keeping well and he was persuaded by his physician Jivaka to go and visit Buddha in Rajagraha. Earlier under the influence of his mentor Devdutta, king Ajatshatru had killed his father Bimbisar to become the emperor of the Magadha empire. He also had conspired to eliminate Buddha on the advice of Devdutt. Therefore after much reluctance, king Ajatshatru conceded to visit Buddha in the mango grove. So a day later when Ajatshatru entered into the mango grove along with Jivaka, the physician, there was much silence in the forest and that made him tremble with fear and he suspected this as a ploy to kill him by his conspirators. He drew out his sword and asked his companions about where are the thousand people they were talking about. And that he had been here earlier as well, but this jungle was never so silent, even the birds were silent that day.Then he saw Buddha sitting under a mango tree, and a thousand monks sitting silently in meditation. A little while later, when Buddha opened his eyes, the king asked him about why everything was so still and calm here, as if everybody was dead there?

Buddha replied – a lot of things have happened to them, they are no more mad. Until unless one is silent and calm with oneself, one cannot know the existence, what is life, what is happiness and what are the blessings of life. Today in the company of a thousand of silent monks, even the trees, animals and birds have joined chorus of the song of silence. Buddha forgave Ajatshatru for his misdeeds and told him to follow the path of peace. That night for the first time the king slept well. This visit of the king Ajatshatru is famously depicted at the site of Buddhist Stupa in Bharhut in Madhya Pradesh (india). 

Another tale relates to the famous esotericist Peter D. Ouspensky. Ouspensky under the influence of his teacher George Ivanovich Gurdjieff, went into a month of silence and seclusion in a house in Russia. He lived in a dark room for 30 days, with nothing to read or listen to. His food was given at regular interval without any communication. On 31st day when Ouspensky came out of the room and he roamed on the streets, everything looked to him like a miracle or dream or maya. People walking on the streets seemed to him like unconscious (crazy) people moving aimlessly. He felt a new surge in his senses, his sensitivity and  inquisitiveness had increased manifold in last 30 days. He has written about it in detail in his book ‘In Search of Miraculous’. Probably this dream world is what is called Maya by great Hindu philosopher-saint Adi Sankaracharya.

I also felt, a child until she starts speaking, is doing some kind of silent meditation, looking-gaping at the world with a very different vision. As soon as she starts speaking-listening, she starts drifting away from the reality and joins us in this imaginary world.  

Let us be silent, that we may hear the whisper of God.

मैं कुछ ज़्यादा बातें करता हूँ – महमूद दरवीश

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अरबी के मशहूर कवि महमूद दरवीश (Mahmoud Darwish) के कविता संग्रह (Unfortunately, It Was Paradise: Selected Poems) से

मैं कुछ ज़्यादा बातें करता हूँ।

मैं कुछ ज़्यादा बातें करता हूँ औरतों और दरख़्तों की छोटी-छोटी समानताओं के बारे में, और दुनिया की तरक्की के बारे में, और उस देश के बारे में जिसकी अपनी कोई पासपोर्ट की मुहर नहीं है।
मैं पूछता हूँ, क्या यह सच है देवियों और सज्जनों, कि आदमी की यह दुनिया सभी इंसानों के लिए बनी है।
जैसा कि आप कहते हैं? तो मेरी छोटी-सी झोंपड़ी कहाँ है और मैं कहाँ हूँ?
सम्मेलन के श्रोता तीन मिनट तक तालियाँ बजाते हैं।
तीन मिनट की आज़ादी और पहचान,
सम्मेलन हमारी वापसी के अधिकार को मानता है, मुर्गियों और घोड़ों की तरह, जैसे कि पत्थर से बना कोई सपना हो।
मैं एक-एक कर सबसे हाथ मिलाता हूँ, अपनी गरदन झुकाता हूँ, और फिर एक चल पड़ता हूँ एक सराब और बारिश का फ़र्क बताने एक दूसरे मुल्क की ओर।
मैं पूछता हूँ, क्या यह सच है देवियों और सज्जनों, कि आदमी की यह दुनिया सभी इंसानों के लिए बनी है।

हिन्दी अनुवाद: अभिषेक अवतंस