Boats

boats

The Taoists have a famous teaching about an empty boat that rams into your boat in the middle of a river. While you probably wouldn’t be angry at an empty boat, you might well become enraged if someone were at its helm. The point of the story is that the parents who didn’t take care of you, the other kids who teased and bullied you as a child, the driver who aggressively tailgated you yesterday – are all in fact empty, rudderless boats. They were compulsively driven to act as they did by their own un-examined wounds, therefore they did not know what they were doing and had little control over it. Just as an empty boat that rams into us isn’t targeting us, so too people who act unkindly are driven along by the unconscious force of their own wounding and pain.
Until we realize this, we will remain prisoners of our grievance, our past, and our victim identity, all of which keep us from opening to the more powerful currents of life and love that are always flowing through the present moment.
#Taoism

ओला डायरी # 1

ola

सुबह के ठीक साढ़े आठ बज रहे हैं। मैसूरू जानेवाली 11 बजे की शताब्दी एक्सप्रेस लेने के लिए हमने सुबह थोड़ा जल्दी ही निकलने का फ़ैसला किया है। बंगलुरू के ट्रैफ़िक और बसों की हड़ताल का असर सड़कों पर दिखने का अंदेशा है। ओला वालों को उनके एप पर जे.पी. नगर आने का संदेश दे दिया है। मकान से बाहर निकलते देखा कि बाहर ओला टैक्सी हमारा इंतज़ार कर रही है। गाड़ी कोई ख़ास बड़ी नहीं है – इंडिका – वी 2 है।  बहन टैक्सी वाले से कन्नड़ में कुछ कहती है। शायद यह कि हमें कहाँ जाना है, और ट्रेन का समय वग़ैरह। हम लोग टैक्सी में बैठते। बच्चे अपनी माँ के साथ पीछे बैठे हैं और मैं ड्राइवर के साथवाली सीट पर। ड्राइवर मुझसे हिन्दी में पूछता है – आपको मैजिस्टिक जाना है सर? मैंने कहा – जी हाँ – वहीं बैंगलोर सिटी रेलवे स्टेशन। मैसूरु जानेवाली शताब्दी पकड़नी है।

कुछ दूर आगे बढ़ते ही बड़े अपार्टमेन्ट कॉमप्लेक्सों के अहाते से बाहर की दुनिया दिखाई दे रही। लोग चाय-नाश्ते की दुकानों पर खड़े हैं। आज रविवार है ऐसा लग नहीं रहा, सड़क पर काफ़ी भीड़ है। सड़कों के किनारे कचरा फैल रहा है। खाली पड़ी ज़मीन पर लोगों ने कचरे का अंबार लगा दिया है। मैं मन ही मन सोचता हूँ – भारत की तथाकथित सिलिकॉन वैली बैंगलोर में भी वही हाल है कचरे का – स्वच्छ भारत अभियान गया तेल लेने। पत्नी को कहता हूँ – look,  that is the main difference between ‘’here’’ and ‘’there’’.

मैं खिड़की से बाहर देख ही रहा हूँ कि अचानक मेरे कानों में कुछ अलग-सा सुनाई देता है – “तुमी कि कोरी आसे। मोइ ना जानू….

देखा तो ड्राइवर महोदय अपने इयरफ़ोन के द्वारा किसी से से फ़ोन पर बात कर रहे हैं। कुछ देर मैं बातचीत ख़त्म हो जाती है।

मैं पूछता हूँ – भैया आप आसाम से हैं?

ओला ड्राइवर – जी, आपको कैसे मालूम?

मैं कहता हूँ – भाल आसु भाईटी? आजिर बोतोर भाल आसे। हा हा हा, (हँसते हुए) आप फ़ोन पर अहोमिया में बात कर रहे थे न, इसलिए। और यहाँ डैशबोर्ड आपकी आईडी पर भी लिखा है – राज बोड़ो। आप बोड़ोलैंड से हैं। कोकराझार?

ओला ड्राइवर – आप अहोमिया समझते हैं? आपको तो आसाम के बारे में बहुत कुछ मालूम है सर। आप वहाँ गए हैं? मेरा घर कोकराझार के पास है ही है। मेरे मदर-फ़ादर और भाई लोग वहीं रहते हैं।

मैं कहता हूँ – हाँ दो-तीन बार गया हूँ – नोर्थ-ईस्ट के मेरे कई दोस्त रहे हैं। जब दिल्ली में पढ़ता था तब। शिलांग भी आना जाना लगा रहता है। मैं दो बार नागालैंड भी गया हूँ। आप यहाँ बैंगलोर कैसे आए?

ओला ड्राइवर – मेरी बड़ी बहन यहाँ रहती है। उसके पास 7 साल पहले यहाँ आया था। फिर कुछ दिन बाद गाड़ी चलाना सीख लिया। और अब अपनी गाड़ी ले ली। ये गाड़ी अपनी है। दो साल पहले ख़रीदी है। यहाँ नोर्थ ईस्ट के बहुत लोग रहते हैं। ड्राइविंग लाइन में बहुत कम हैं। बोड़ो में मैं शायद अकेला हूँ। मणिपुर के लोग होटेलिंग में बहुत काम करते हैं। ड्राइविंग में लोकल और तमिल ज़्यादा हैं।

मैं: बहुत बढ़िया, अच्छा काम किया। आप गाड़ी सिर्फ़ ओला के लिए चलाते हैं?

ओला ड्राइवर: नहीं नहीं – ओला का काम मैं सिर्फ़ सुबह या रात को लेता हूँ। बाक़ी टाइम में बी.एस.एन.एल के लिए काम करता हूँ। 11 बजे से काम शुरू होता है। मेरा ऑफ़िस मैंजिस्टिक के पास ही है, इसलिए ओला से आपकी भी सवारी ले ली।

मैं: आप बी.एस.एन.एल के दफ़्तर में काम करते हैं? क्या काम करते हैं?

ओला ड्राइवर: नहीं गाड़ी ही चलाता हूँ। बी.एस.एन.एल. को ये गाड़ी लीज़ पर दी है। हर दिन उनके इंजीनियर को लेकर जाना होता है।

मैं: अच्छा यह बहुत बढ़िया है। काफ़ी पैसे मिलते होंगे। इंजीनियर लोग कहाँ जाते हैं?

ओला ड्राइवर: यही टावर –बावर को देखने जाते हैं। कोई प्रोब्लेम होने से जाते हैं। एक दिन एक टावर तो देखते ही हैं। एक महीना का बीस हज़ार देते हैं। गाड़ी और डीज़ल मेरे अपने हैं। ओला और बी.एस.एन.एल जोड़कर एक महीने में 30-32 कमा लेता हूँ।

मैं: यह बहुत अच्छी बात है। आप यंग हैं और बहुत मेहनती हैं। और आप हिन्दी भी बहुत अच्छी बोलते हैं।

ओला ड्राइवर: बी.एस.एन.एल का काम मेरा तीन बजे तक ख़त्म हो जाता है। इंजीनियर लोग एक दिन में एक ही कंप्लेन देखते हैं। वहाँ से आने के बाद छुट्टी। चार बजे तक मैं घर वापिस आ जाता हूँ।

मैं: बहुत लंबा जाना पड़ता होगा आपको? इसमें तो बहुत डीज़ल जाएगा।

ओला ड्राइवर: नहीं बहुत लंबा नहीं। हर ऑफ़िस का अपना सर्किल है। उसी में जाना होता है। वैसे बंगलोर बहुत बड़ा शहर है। लंबा जाने से मुश्किल हो जाएगी।

मैं: अच्छा-अच्छा यह ठीक है। आप कन्नड़ बोल लेते हैं? मैंने सुना आप कन्नड़ बोल रहे थे?

ओला ड्राइवर: जी बोलता हूँ। यहाँ काम करने के लिए लैंग्वेज सीखना ज़रूरी है।

मैं: कन्नड़ कहाँ सीखी आपने?

ओला ड्राइवर: वो पहले जो मेरा मकान मालिक था ना, उन लोगों ने सिखाया मुझे। उसकी फ़ैमिली में सब लोग सिर्फ़ कन्नड़ और तेलुगु ही बोलते-समझते थे। इसलिए बोल-बोल के सीख गया। दो साल तक मेरे मकान मालिक ने मुझसे सिर्फ़ कन्नड़ में बात किया, फिर मैं सीख गया। अब बोल लेता हूँ।

मैं: यह तो कमाल की बात है। बहुत अच्छा। अभी कुछ साल पहले यहाँ लफ़ड़ा हुआ था ना, सब नोर्थ ईस्ट वालों को बैंगलोर से भागना पड़ा था। कुछ ख़ून-खराबा हुआ था। मुझे साल याद नहीं है।

ओला ड्राइवर: ये केस अगस्त 2012  का है सर। सब लोगों को यहाँ से भागना पड़ा था। लेकिन मैं नहीं गया। मेरा पुलिस में एक लोकल दोस्त है। उसने मुझे अपना नंबर देकर कहा कि कोई प्रोब्लेम होने पर फ़ोन करना। मैं वापस नहीं गया लेकिन बहुत सारे लोग भाग गए थे। सबके फ़ोन पर मैसेज आया था कि यहाँ रहने वाले नौर्थ ईस्ट के लोगों को मारना है। रेलवे ने स्पेशल ट्रेन भी चलवाई थी। कुछ मारपीट हुई थी लेकिन ज़्यादा लोग डर गए थे।

मैं: कौन मारना चाहता था?

ओला ड्राइवर : यहाँ के कुछ लोकल मोहम्मडन लोग। वहाँ आसाम में कोकराझार में दंगा हुआ। उसी का बदला यहाँ लेने का बात कर रहे थे। लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं हुआ। यहाँ के लोकल कन्नडिगा और पुलिस ने बहुत कंट्रोल किया।  

मैं: चलिए अच्छी बात है। आप सब लोग सेफ़ है यहाँ पर।

ओला ड्राइवर: आप यहाँ घूमने आए हैं सर? कहाँ रहते हैं?

मैं: मेरी बहन यहाँ रहती है। हमलोग उसी से मिलने आए हैं। फ़िलहाल फ़ौरेन में रहते हैं।

ओला ड्राइवर : लीजिए आपका मैजिस्टिक आ गया।

मैं: कितने पैसे हुए? थैंक यू।

 

 

 

 

 

Poems from Punjab

इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत, गुम है, गुम है, गुम है।
“A girl whose name is love, is missing, is missing, is missing”
Shiv Kumar Batalvi ((23 July 1936 – 7 May 1973)
A famous Punjabi language poet with a folk consciousness and modern sensibility, Shiv Kumar excelled with a freshness of vocabulary, diction, imagery and rhythmic flow of words which remain unparalleled in Punjabi poetry. Shiv was born in a village near Sialkot (Pakistan). His family moved to Batala, Gurdaspur (India) after Indian partition in 1947. The pangs of this separation are recurrent themes of this great poet of the land. One of my current favorites composed by Shiv Kumar Batalvi is ”ik kudi jida naam mohabbat, gum hai gum hai” sung by Shahid Mallya in his beautiful voice. From the soundtrack of Udta Punjab (2016)

Bhojpuri Translation of Basava Anthology

basava

Pleased to know that Bhojpuri Translation of Basava Vachanamrutha (poems composed by Lord Basaveshwara in Kannada) is recently published by Basava Samithi, Bengaluru. The multilingual translation project was steered under the leadership of late Dr. M.M. Kulburgi. The principal editor of the Bhojpuri version is Prof. dr. B.S. Tiwary (my father).
Lord Basava was a 12th-century Indian philosopher, statesman, Kannada poet, and was the founding saint of the Lingayat-Shaivism sect of Hinduism in Karnataka. Basava staunchly believed in a caste-less society where each individual had equal opportunity to rise up in life. The Website of Basava Samithi from where you can order the book is here

http://www.basavasamithi.org/

 

Survival Phrases in Telugu Language

telugu

Hyderabad is a melting pot of cultures. Since Hyderabad was ruled by Nizams for a long time, the native language here was originally Dakhini / Urdu. Today there are four major languages spoken in Hyderabad –  Telugu, Urdu, Hindi & English.

Telugu is a Dravidian language native to India. It stands alongside Hindi, English and Bengali as one of the few languages that predominate in more than one Indian state; it is the primary language in the states of Andhra Pradesh and Telangana. It is one of six languages designated as a classical language of India by the Government of India. Telugu is written in Telugu script [ Telugu lipi in Telugu].

ST Graphics -new Andhra Pradesh capital

Some common phrases in Telugu are given below :

English – Hindi – Telugu ( in Roman and Devanagari Script)

English – Hindi – Telugu ( in Roman and Devanagari Script)

Some Common Phrases

English Hindi Hindi in Roman Telugu (in Devanagari) Telugu (in script) Telugu in Roman
Hello नमस्ते namaste नमस्ते / नमस्कारम నమస్తే / నమస్కారం namaste / namaskaaram
Good अच्छा achchha मेलू మేలు meloo
Thanks धन्यवाद / शुक्रिया dhanyavaad / shukriya दन्यवादालु ధన్యవాదాలు danyavaadaalu
Excuse me माफ़ कीजिए maaf keejie नन्नु क्षमीणचंडी క్షమించండి nannu kshameenachandi
I am fine मैं ठीक हूँ। main theek hooein. नेनु बागुन्नानु నేను బాగున్నాను nenu baagunnaanu
And you? और आप? Aur aap? मारि मीरु? మరియు మీరు maari meeru
What is your name? आपका नाम क्या है? Aapaka naam kya hai? मी पेरू एमिटी? నీ పేరు ఏమిటి ? mi peroo emiti?
My name is Lucas. मेरा नाम लुकास है। mera naam lukaas hai. ना पेरु लुकास నా పేరు లుకాస్ na peru lukaas
I am from Holland मैं हॉलैंड से हूँ। main haulaind se hooein. नेनु हौलैंड नुंडी वच्चावु నేను హాలండ్ నుండి వచ్చి nenu haulaind nundi vachchaavu
I don’t  speak Telugu. मैं तेलुगु नहीं बोलता / बोलती। main telugu naheen bolata / bolati. नेनु तेलुगु माटलाडनु నేను తెలుగు మాట్లాడుతారు nenu telugu maatalaadanu
Where are you from? आप कहाँ से हैं? Aap kahaan se hain? मीरू एक्कड़ा नुंची वच्चावु। మీరు ఎక్కడ నుంచి వచ్చావు meeroo ekkarha nunchi vachchaavu.
Who are you? आप कौन हैं? Aap kaun hain? नुव्वू यवरु నువ్వు ఎవరు nuvvoo yavaru
Nice to meet you. आपसे मिलकर अच्छा लगा aapase milakar achchha laga मिम्मलिनी कलावटम संतोषमुगा उंडी మిమ్మల్ని కలవటం సంతోషముగా ఉంది mimmalini kalaavatam santoshamuga undi
Please come आइए aaie रंडी రండి randi
Please go जाइए jaaie वेल्लंडी వెళ్ళండి vellandi
Please sit बैठिए baithie कुरचंडी కూర్చోండి kurachandi
Please give दीजिए deejie इवंडी ఇవ్వాడి ivandi
Please stop ठहरिए thaharie आगंडी ఆగండి aagandi
It’s Good / okay. अच्छा / ठीक है। achchha / theek hai. मंची మంచి manchi
How much is this? यह कितने का है? Yah kitane ka hai? इदि इन्ता ఇది ఎంత ? idi inta
This is a dog. यह कुत्ता है। yah kutta hai. इदि कुक्क ఇది కుక్క idi kukk
How much is that? वह कितने का है? Vah kitane ka hai? अदि इन्ता ఎంత? Adi intaa
I need ………. मुझे …….चाहिए mujhe …….chaahie नाकु कावालि …… నాకు కావాలి naaku kaavaali …..
I don’t want anything मुझे कुछ नहीं चाहिए। mujhe kuchh naheen chaahie नाकु एमि वद्‍दु నాకు ఏమివద్దు naaku emi vad‍du
See you later फिर मिलेंगे phir milenge वेल्लीरेंडी / वेल्लीवस्तानु లోపలికి రండి velleerendi / velleevastaanu
Please come inside अंदर आइए andar aaie लोपलिकीरंडी ధన్యవాదాలు lopalikeerandi
Happy Birthday जन्मदिन की शुभकामनाएँ janmadin ki shubhakaamanaaeein पुत्तिनरोजु शुभाकांक्षलू పుట్టిన రోజు శుభాకాంక్షలు puttinaroju shubhaakaankshaloo
I will call the police मैं पुलिस बुलाऊँगी main pulis bulaaooeingi नेनु पुलिस नि पिलुस्तानु నేను పోలీసు చేస్తుంది nenu pulis ni pilustaanu
Stop! Thief! रोको, चोर roko, chora अपंडी, डोंगा దొంగ ఆపడానికి apandi, donga

Some Basic Vocabulary

Yes जी हाँ ji haan अवनु అవును avanu
No जी नहीं ji naheen कादु కాదు kaadu
There वहाँ vahaan अक्कड़ा అక్కడ akkarha
Here यहाँ yahaan इक्कड़ा ఇక్కడ ikkarha
Where कहाँ kahaan एक्कड़ा ఎక్కడ ekkarha
When कब kab यप्पड़ु ఎప్పుడు yapparhu
Who कौन kaun यवरु ఎవరు yavaru
What क्या kya यमी ఏమి yami

 

Some Food Related Vocabulary

English Hindi Hindi in Roman Telugu (in Devanagari) Telugu (in script) Telugu in Roman
Meat मांस / गोश्त maans / gosht मांसमु మాంసము maansmu
Drinking  Water पीने का पानी peene ka paani मंची नीरू (good water) మంచి నీరు manchi neeroo (good water)
Meal खाना khaana भोजनम భోజనం bhojanam
Milk दूध doodh पालू పాల paaloo
Yoghurt दही dahii पेरुगु పెరుగు perugu
Butter milk मट्ठा mattha मज्जिग మజ్జిగ majjiga
Lentils दाल daal पप्पु పప్పు pappu
Cooked rice भात bhaat अन्नमु అన్నం annamu
Salt नमक namak उप्पु ఉప్పు uppu
Sugar चीनी / शक्कर chiinii / shakkar चक्केर చక్కెర cakkera
Oil तेल tel नुने నూనె nune
Sauce / chutney चटनी chatanii पच्चड़ी పచ్చడి pacchadii
Tomato टमाटर tamaatar टमोटा టమోటా tamota
Vegetable Curry सब्ज़ी / तरकारी sabzii / tarkaarii कूर కూర koora
Vada वड़ा Vada गारेलु గారెలు gaarelu

Numbers : 1 to 10

one एक ek ओकटी ఒకటి okati
two दो do रेन्डु రెండు rendu
three तीन teen मूडु మూడు moodu
four चार chaar नालुगु నాలుగు naalugu
five पाँच paanch आइदु అయిదు aaidu
six छह chhah आरु ఆరు aaru
seven सात saat येडु ఏడు yedu
eight आठ aath येनिमिदि ఎనిమిది yenimidi
nine नौ nau तोम्मिदि తొమ్మిది tommidi
ten दस das पदि పది padi

 

यूरोप का बग़ीचा – केइकॉन्हॉफ़

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कामकाजी व्यस्तताओं के बीच ज़्यादा कहीं आना-जाना हो नहीं पाता लेकिन साल में एक बार हम  नीदरलैण्ड के केइकॉन्हॉफ़ बाग़ जाना नहीं भूलते। पिछली 19 अप्रैल 2015 को हमलोग केइकॉन्हॉफ़ (Keukenhof) गए। ककेइकॉन्हॉफ़ क्या है और कहाँ है? कुछ जानकारी –

दक्षिण हॉलैण्ड प्रदेश में लिसअ नाम की एक जगह है। लिसअ में फूलों का बहुत बड़ा बाग़ केइकॉन्हॉफ़ है जिसे यूरोप का बग़ीचा भी कहा जाता है। वसंत के मौसम में हर साल मार्च से मई (सिर्फ़ आठ हफ़्ते) तक आम लोगों के लिए खुलने वाले इस बग़ीचे को लिसअ शहर की नगरपालिका ने 1949 में स्थापित किया था। डच भाषा में केइकॉन्हॉफ़ का मतलब – ’रसोई का बग़ीचा’ है। यह बाग़ मुख्य रूप से अपने ट्यूलिप के फूलों के लिए प्रसिद्ध है। 79 एकड़ के इलाके में फ़ैले इस बाग़ में हर साल लगभग 70 लाख ट्यूलिप फूलों के कंद (बल्ब) रोपे जाते हैं। ट्यूलिप शब्द मूल रूप से फ़ारसी भाषा के शब्द दुलबन्द (यानी पगड़ी) से बरास्ते फ़्रांसीसी आया है। ऐसा इसलिए कि ट्यूलिप के फूल को उलटने पर वह एक पगड़ी की तरह दिखाई देता है। प्राकृतिक रूप से ट्यूलिप के फूल मध्य एशिया, तुर्की, मंगोलिया और तिन शियान हिमालय की पहाड़ियों में पाए जाते हैं। सत्रहवीं शताब्दी में ट्यूलिप फूलों का यूरोप में प्रवेश हुआ। 1636-1637 के दौरान यह फूल नीदरलैण्ड में इतना लोकप्रिय हुआ कि इन फूलों की ख़रीद-बिक्री पर सट्टेबाज़ी होने लगी। इसे ट्यूलिप मैनिया यानी ट्यूलिप पागलपन कहा जाता है। नीदरलैण्ड के साथ ट्यूलिप की कहानी इतनी ही पुरानी है। ग़ौरतलब यह भी है कि आज नीदरलैण्ड दुनिया में ट्यूलिप फूलों का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

केइकॉन्हॉफ़ में प्रवेश शुल्क एक व्यक्ति के लिए लगभग 1100 ₹ ( यानी 16 €) है। तीन साल से कम उम्र के बच्चे बाग में मुफ़्त जा सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क में कोई रियायत नहीं है।

कुछ चित्र –

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द शॉप ऑन द मेन स्ट्रीट (1989)

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अभी कुछ दिन हुए मैंने  एक चेक-स्लोवाक भाषा में बनी फ़िल्म देखी – Obchod na Korze  यानी अंग्रेज़ी में ‘द शॉप ऑन द मेन स्ट्रीट (The Shop on the Main Street)’। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान स्लोवाकिया के एक छोटे-से शहर के जीवन पर आधारित यह फ़िल्म ऑस्कर जीतने वाली पहली चेक और स्लोवाक फ़िल्म थी।  इस श्वेत-श्याम फ़िल्म  की कहानी वर्ष 1942 की है जब स्लोवाकिया पर नात्सी जर्मनी की कठपुतली और तानाशाही सरकार का शासन था। फ़िल्म का मुख्य किरदार टोनो ब्रत्को  एक सीधा-सादा बढ़ई है। ब्रत्को को उसका फ़ासीवादी साढ़ू जो कि एक पुलिस अधिकारी है, चालबाज़ी से एक बूढ़ी और ऊँचा सुनने वाली यहूदी महिला श्रीमती लाउटमान की बटनों की दूकान का आर्य स्वामी बनवा देता है। ज्ञात हो कि नात्सी शासन के दौरान जर्मनी, पोलैण्ड, चेकोस्लोवाकिया, ऑस्ट्रिया समेत यूरोप के कई देशों में एक क़ानून के तहत यहूदी व्यापारिक प्रतिष्ठानों का मलिकाना हक़ स्थानीय (तथाकथित) आर्य समुदाय के चुने हुए लोगों को सौंप दिया गया था। इसका मतलब था कि नात्सी शासन के क़ानून के मुताबिक हर यहूदी दूकान मालिक के लिए एक आर्य स्वामी का होना अनिवार्य था।  टोनो एक जिंदादिल इंसान है जो उसके देश में हो रही फ़ासीवादी क्रांति से सहमत नहीं है। टोनो का साढ़ू जब उसके घर महँगी शराब लिए रात के खाने पर आता है, तो टोनो शराब के नशे में अडोल्फ़ हिटलर की नकलकर उसका मखौल उड़ाता है। फ़िल्म का यह दृश्य अपने-आप में अनोखा –

 

फ़िल्म में शहर की मुख्य सड़क पर विधवा महिला श्रीमती लाउटमान की बटन व लेस की एक पुरानी दूकान है।  यह बात उस समय से कुछ ही पहले की है जब नात्सी शासन द्वारा यहूदी मूल के लोगों को यूरोप भर से जबरन यातना शिविरों में भेजना शुरू हुआ था। भोलाभोला टोनो जब पहली बार श्रीमती लाउटमान की दुकान पर अपना कब्जा लेने आता है तो वृद्ध महिला पहले उसे ग्राहक समझती, फिर टैक्स जमा करने वाला और अंत में एक बेरोज़गार आदमी। इस दौरान टोनो उन्हें समझाने कि कई दफ़ा कोशिश करता है कि वह दुकान का आर्य स्वामी। पर बुढ़िया समझे तब तो बात आगे बढ़े। अगले दिन से टोनो श्रीमती लाउटमान के पुराने जर्जर हो चुके फ़र्नीचर को दुरुस्त करने में लग जाता है। दरअसल फ़िल्म उस मानवीय रिश्ते की दास्तान है जो टोनो ब्रत्को और श्रीमती लाउटमान के मध्य विकसित होता है। मानवीय संबंध किस प्रकार इन अमानवीय, क्रूर और कठिन परिस्थितियों  में विकसित होते हैं। एक सीधा-सादा आदमी अपने आप को कैसे इन परिस्थितियों में अपने-आपको बेबस पाता है, यह आप इस मर्मस्पर्शी फ़िल्म में देख सकते हैं।

फ़िल्म में मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं – इदा कमिन्स्का (श्रीमती लाउटमान), जोज़ेफ़ क्रोनर (टोनो ब्रत्को) और हाना सिल्व्कोवा ( टोनो की पत्नी)।

फ़िल्म के निर्देशक हैं – यान क़ादर