यात्रा के पन्ने (1952) – राहुल सांकृत्यायन

Tibetans

Tibet in 1930.

राहुल सांकृत्यायन का यात्रा संस्मरण ‘यात्रा के पन्ने‘ (1952, साहित्य सदन, देहरादून)

राहुल सांकृत्यायन (1893-1963) मेरे पसंदीदा लेखकों में से एक हैं।  राहुल को हिन्दी में घुमक्कड़ शास्त्र का प्रणेता माना जाता है। उनके लिखे यात्रा वृत्तांत आपको बरबस ही उस प्रदेश के लोगों और उनकी भाषा-संस्कृति से जोड़ते हैं, जहाँ से आप शायद ही गुज़रे हों। राहुल हमेशा घुमक्कड़ ही रहे। सन्‌ 1923 से उनकी विदेश यात्राओं का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर उनके सफ़र का अंत उनके जीवन के साथ ही हुआ। ज्ञान की खोज में की गईं उनकी इन यात्राओं में श्रीलंका, तिब्बत, जापान और रूस की यात्राएँ ख़ास हैं। वे चार बार तिब्बत गए। वहाँ लम्बे समय तक रहे और भारत की उस प्राचीन बौद्धिक विरासत का उद्धार किया, जो हमारे लिए अज्ञात, अलभ्य और विस्मृत हो चुकी थी।अध्ययन-अनुसंधान की आभा के साथ वे वहाँ से प्रभूत सामग्री लेकर लौटे जो भारतीय धर्म, दर्शन और भाषाविज्ञान के लिए अमूल्य हैं।भारत के संदर्भ में उनका यह काम चीनी खोजी यात्री ह्वेनसांग से कम नहीं आँका जा सकता।  सूदूर देशों की यात्राओं की तरह उनके जीवन में उनकी एक वैचारिक यात्रा की ओर भी संकेत मिलता है, जो पारिवारिक स्तर पर स्वीकृत वैष्णव मत से शुरू हो, आर्य समाज एवं बौद्ध मतवाद से गुजरती हुई मार्क्सवाद पर जाकर खत्म होती है।

1952 में छपे राहुल सांकृत्यायन के यात्रा संस्मरण संग्रह (‘यात्रा के पन्ने’, कुल 450 पृष्ठ) की एक बहुत पुरानी प्रति मेरे हाथ लगी तो मैं उसे सार्वजनिक रूप से आप सबसे बाँटने का लोभ संवरण नहीं कर सका। आप इस किताब की पी.डी.एफ़ प्रति यहाँ से मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं। 

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कुछ बोध कथाएँ

अपनी झोली

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दो आदमी यात्रा पर निकले। दोनों की मुलाकात हुई। दोनों यात्रा में एक साथ जाने लगे। दस दिनों के बाद दोनों के अलग होने का समय आया तो एक ने कहा, ‘भाईसाहब! एक दस दिनों तक हम दोनों साथ रहे। क्या आपने मुझे पहचाना?’ दूसरे ने कहा, ‘नहीं, मैंने तो नहीं पहचाना।’ वह बोला, ‘माफ़ करें मैं एक नामी ठग हूं। लेकिन आप तो महाठग हैं। आप मेरे भी उस्ताद निकले।’

‘कैसे?’ ‘कुछ पाने की आशा में मैंने निरंतर दस दिनों तक आपकी तलाशी ली, मुझे कुछ भी नहीं मिला। इतनी बड़ी यात्रा पर निकले हैं तो क्या आपके पास कुछ भी नहीं है? आप बिल्कुल ख़ाली हाथ हैं?’

‘नहीं, मेरे पास एक बहुत क़ीमती हीरा है और एक सोने का कंगन है ।’

‘तो फिर इतनी कोशिश के बावजूद वह मुझे मिले क्यों नहीं?’

‘बहुत सीधा और सरल उपाय मैंने काम में लिया। मैं जब भी बाहर जाता, वह हीरा और सोने का कंगन तुम्हारी पोटली में रख देता था। तुम सात दिनों तक मेरी झोली टटोलते रहे। अपनी पोटली संभालने की जरूरत ही नहीं समझी। तुम्हें मिलता कहाँ से?’

कहने का मतलब यह कि हम अपनी गठरी संभालने की ज़रूरत नहीं समझते। हमारी निगाह तो दूसरों की झोली पर रहती है। यही हमारी सबसे बड़ी समस्या है। अपनी गठरी टटोलें, अपने आप पर दृष्टिपात करें तो अपनी कमी समझ में आ जाएगी।

 सीमा

Old Woman India

सड़क किनारे एक बुढ़िया अपना ढाबा चलाती थी। एक यात्री आया। दिन भर का थका, उसने विश्राम करने की सोची। बुढिया से कहा, ‘क्या रात के लिए यहाँ आश्रय मिल सकेगा?’ बुढिया ने कहा, क्यों नहीं, आराम से यहां रात भर सो सकते हो।’

यात्री ने पास में पड़ी चारपाइयों की ओर संकेत कर कहा, ‘इस पर सोने का क्या चार्ज लगेगा?’ बुढ़िया ने कहा, ‘चारपाई पर सोने के लिए दस रूपए लगेंगे।’ यात्री ने सोचा रात भर की ही तो बात है। बेकार में दस रूपए क्यों खर्च की जाए। आंगन में काफी जगह है, वहीं सो जाऊंगा।

यह सोचकर उसने फिर कहा, ‘और अगर चारपाई पर न सोकर आंगन की ज़मीन पर ही रात काट लूँ तो क्या लगेगा?’ ‘फिर पूरे सौ रूपए लगेंगे -‘ बुढ़िया ने कहा।

बुढ़िया की बात सुन यात्री को उसके दिमाग पर संदेह हुआ। चारपाई पर सोने के दस रूपए और भूमि पर चादर बिछाकर सोने के लिए सौ रूपए – यह तो बड़ी विचित्र बात है। उसने बुढिया से पूछा, ‘ ऐसा क्यों?’

बुढ़िया ने कहा, ‘चारपाई की सीमा है। तीन फुट चौड़ी, छह फुट लंबी जगह ही घेरोगे। बिना चारपाई सोओगे तो पता नहीं कितनी जगह घेर लो।’ सीमा में रहना ही ठीक है। असीम की बात समस्या पैदा करती है।

भारतीय नरक

indian hell

एक बार एक भारतीय व्यक्ति मरकर नरक में पहुँचा,
तो वहाँ उसने देखा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी देश के नरक में जाने की छूट है ।
उसने सोचा, चलो अमेरिकावासियों के नरक में जाकर देखें, जब वह वहाँ पहुँचा तो द्वार पर पहरेदार से उसने पूछा – क्यों भाई अमेरिकी नरक में क्या- क्या होता है ? पहरेदार बोला – कुछ खास नहीं, सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक चेयर पर एक घंटा बैठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे लिटाया जायेगा, उसके बाद एक यमदूत आकर आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोड़े बरसायेगा…
बस! यह सुनकर वह व्यक्ति बहुत घबराया औरउसने रूस के नरक की ओर रुख किया, और वहाँ के पहरेदार से भी वही पूछा, रूस के पहरेदार ने भी लगभग वही वाकया सुनाया जो वह अमेरिका के नरक में सुनकर आया था । फ़िर वह व्यक्ति एक- एक करके सभी देशों के नर्कों के दरवाजे जाकर आया, सभी जगह उसे एक से बढकर एक भयानक किस्से सुनने को मिले । अन्त में थक- हार कर जब वह एक जगह पहुँचा, देखा तो दरवाजे पर लिखा था “भारतीय नरक” और उस दरवाजे के बाहर उस नरक में जाने के लिये लम्बी लाईन लगी थी, लोग भारतीय नरक में जाने को उतावले हो रहे थे, उसने सोचा कि जरूर यहाँ सजा कम मिलती होगी…
तत्काल उसने पहरेदार से पूछा कि यहाँ के नरक में सजा की क्या व्यवस्था है ? पहरेदार ने कहा – कुछ खास नहीं…सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक चेयर पर एकघंटा बैठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे लिटाया जायेगा, उसके बाद एक यमदूत आकर आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोड़े बरसायेगा… बस !

चकराये हुए व्यक्ति ने उससे पूछा – यही सब तो बाकी देशों के नरक में भी हो रहा है, फ़िर यहाँ इतनी भीड क्यों है ? पहरेदार बोला – इलेक्ट्रिक चेयर तो वही है, लेकिन बिजली नहीं है, कीलों वाले बिस्तर में से कीलें कोई निकाल ले गया है, और कोड़े मारने वाला यमदूत सरकारी कर्मचारी है, आता है, दस्तखत करता है और चाय-नाश्ता करने चला जाता है…औरकभी गलती से जल्दी वापस आ भी गया तो एक-दो कोड़े मारता है और पचास लिख देता है…चलो आ जाओ अन्दर !!

 

Survival Phrases in Telugu Language

telugu

Hyderabad is a melting pot of cultures. Since Hyderabad was ruled by Nizams for a long time, the native language here was originally Dakhini / Urdu. Today there are four major languages spoken in Hyderabad –  Telugu, Urdu, Hindi & English.

Telugu is a Dravidian language native to India. It stands alongside Hindi, English and Bengali as one of the few languages that predominate in more than one Indian state; it is the primary language in the states of Andhra Pradesh and Telangana. It is one of six languages designated as a classical language of India by the Government of India. Telugu is written in Telugu script [ Telugu lipi in Telugu].

ST Graphics -new Andhra Pradesh capital

Some common phrases in Telugu are given below :

English – Hindi – Telugu ( in Roman and Devanagari Script)

English – Hindi – Telugu ( in Roman and Devanagari Script)

Some Common Phrases

English Hindi Hindi in Roman Telugu (in Devanagari) Telugu (in script) Telugu in Roman
Hello नमस्ते namaste नमस्ते / नमस्कारम నమస్తే / నమస్కారం namaste / namaskaaram
Good अच्छा achchha मेलू మేలు meloo
Thanks धन्यवाद / शुक्रिया dhanyavaad / shukriya दन्यवादालु ధన్యవాదాలు danyavaadaalu
Excuse me माफ़ कीजिए maaf keejie नन्नु क्षमीणचंडी క్షమించండి nannu kshameenachandi
I am fine मैं ठीक हूँ। main theek hooein. नेनु बागुन्नानु నేను బాగున్నాను nenu baagunnaanu
And you? और आप? Aur aap? मारि मीरु? మరియు మీరు maari meeru
What is your name? आपका नाम क्या है? Aapaka naam kya hai? मी पेरू एमिटी? నీ పేరు ఏమిటి ? mi peroo emiti?
My name is Lucas. मेरा नाम लुकास है। mera naam lukaas hai. ना पेरु लुकास నా పేరు లుకాస్ na peru lukaas
I am from Holland मैं हॉलैंड से हूँ। main haulaind se hooein. नेनु हौलैंड नुंडी वच्चावु నేను హాలండ్ నుండి వచ్చి nenu haulaind nundi vachchaavu
I don’t  speak Telugu. मैं तेलुगु नहीं बोलता / बोलती। main telugu naheen bolata / bolati. नेनु तेलुगु माटलाडनु నేను తెలుగు మాట్లాడుతారు nenu telugu maatalaadanu
Where are you from? आप कहाँ से हैं? Aap kahaan se hain? मीरू एक्कड़ा नुंची वच्चावु। మీరు ఎక్కడ నుంచి వచ్చావు meeroo ekkarha nunchi vachchaavu.
Who are you? आप कौन हैं? Aap kaun hain? नुव्वू यवरु నువ్వు ఎవరు nuvvoo yavaru
Nice to meet you. आपसे मिलकर अच्छा लगा aapase milakar achchha laga मिम्मलिनी कलावटम संतोषमुगा उंडी మిమ్మల్ని కలవటం సంతోషముగా ఉంది mimmalini kalaavatam santoshamuga undi
Please come आइए aaie रंडी రండి randi
Please go जाइए jaaie वेल्लंडी వెళ్ళండి vellandi
Please sit बैठिए baithie कुरचंडी కూర్చోండి kurachandi
Please give दीजिए deejie इवंडी ఇవ్వాడి ivandi
Please stop ठहरिए thaharie आगंडी ఆగండి aagandi
It’s Good / okay. अच्छा / ठीक है। achchha / theek hai. मंची మంచి manchi
How much is this? यह कितने का है? Yah kitane ka hai? इदि इन्ता ఇది ఎంత ? idi inta
This is a dog. यह कुत्ता है। yah kutta hai. इदि कुक्क ఇది కుక్క idi kukk
How much is that? वह कितने का है? Vah kitane ka hai? अदि इन्ता ఎంత? Adi intaa
I need ………. मुझे …….चाहिए mujhe …….chaahie नाकु कावालि …… నాకు కావాలి naaku kaavaali …..
I don’t want anything मुझे कुछ नहीं चाहिए। mujhe kuchh naheen chaahie नाकु एमि वद्‍दु నాకు ఏమివద్దు naaku emi vad‍du
See you later फिर मिलेंगे phir milenge वेल्लीरेंडी / वेल्लीवस्तानु లోపలికి రండి velleerendi / velleevastaanu
Please come inside अंदर आइए andar aaie लोपलिकीरंडी ధన్యవాదాలు lopalikeerandi
Happy Birthday जन्मदिन की शुभकामनाएँ janmadin ki shubhakaamanaaeein पुत्तिनरोजु शुभाकांक्षलू పుట్టిన రోజు శుభాకాంక్షలు puttinaroju shubhaakaankshaloo
I will call the police मैं पुलिस बुलाऊँगी main pulis bulaaooeingi नेनु पुलिस नि पिलुस्तानु నేను పోలీసు చేస్తుంది nenu pulis ni pilustaanu
Stop! Thief! रोको, चोर roko, chora अपंडी, डोंगा దొంగ ఆపడానికి apandi, donga

Some Basic Vocabulary

Yes जी हाँ ji haan अवनु అవును avanu
No जी नहीं ji naheen कादु కాదు kaadu
There वहाँ vahaan अक्कड़ा అక్కడ akkarha
Here यहाँ yahaan इक्कड़ा ఇక్కడ ikkarha
Where कहाँ kahaan एक्कड़ा ఎక్కడ ekkarha
When कब kab यप्पड़ु ఎప్పుడు yapparhu
Who कौन kaun यवरु ఎవరు yavaru
What क्या kya यमी ఏమి yami

 

Some Food Related Vocabulary

English Hindi Hindi in Roman Telugu (in Devanagari) Telugu (in script) Telugu in Roman
Meat मांस / गोश्त maans / gosht मांसमु మాంసము maansmu
Drinking  Water पीने का पानी peene ka paani मंची नीरू (good water) మంచి నీరు manchi neeroo (good water)
Meal खाना khaana भोजनम భోజనం bhojanam
Milk दूध doodh पालू పాల paaloo
Yoghurt दही dahii पेरुगु పెరుగు perugu
Butter milk मट्ठा mattha मज्जिग మజ్జిగ majjiga
Lentils दाल daal पप्पु పప్పు pappu
Cooked rice भात bhaat अन्नमु అన్నం annamu
Salt नमक namak उप्पु ఉప్పు uppu
Sugar चीनी / शक्कर chiinii / shakkar चक्केर చక్కెర cakkera
Oil तेल tel नुने నూనె nune
Sauce / chutney चटनी chatanii पच्चड़ी పచ్చడి pacchadii
Tomato टमाटर tamaatar टमोटा టమోటా tamota
Vegetable Curry सब्ज़ी / तरकारी sabzii / tarkaarii कूर కూర koora
Vada वड़ा Vada गारेलु గారెలు gaarelu

Numbers : 1 to 10

one एक ek ओकटी ఒకటి okati
two दो do रेन्डु రెండు rendu
three तीन teen मूडु మూడు moodu
four चार chaar नालुगु నాలుగు naalugu
five पाँच paanch आइदु అయిదు aaidu
six छह chhah आरु ఆరు aaru
seven सात saat येडु ఏడు yedu
eight आठ aath येनिमिदि ఎనిమిది yenimidi
nine नौ nau तोम्मिदि తొమ్మిది tommidi
ten दस das पदि పది padi

 

Genitive Case in World Languages

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This map shows the distribution of genitive case in world language with respect to order of genitive or possessor noun phrase in relation to the head noun.

For example – in English language ‘Pablo’s  carPablo’s is the genitive noun phrase, and car is the head noun . 

or in Hindi-Urdu language

Pablo kI kAr (पाब्लो की कार)Pablo kI  is the genitive noun phrase, and kAr is the head noun.

In the map above Red dots mark the languages with Head Noun-Genitive order, while Blue dots mark languages with Genitive-Head Noun Order. The grey  ones are those which follow no particular order. That means – 

  • In Europe if you speak, Finnish, Hungarian, Swedish, Danish, Latvian, Lithuanian, Estonian , Basque & Turkish, then you will have no problem forming  Genitive-Head Noun phrases like Hindi-Urdu, because they all do the same.
  • In Asia, if you speak Japanese, Chinese, Korean, Mongolian, Armenian, Korean, Georgian, Pashto,  Burmese,Nepali, Tamil, Telegu, Kannada, Malayalam, Bengali, Sinhala  & Tibetan, then you would definitely know how to form Genitive-Head Noun phrases like Hindi-Urdu.
  • In Africa & south America, there are many smaller languages which follow the order of Genitive-Head Noun phrases like Hindi-Urdu.

Source – WALS online

Postpositions in World Languages

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Blue dots represent languages using ‘postpositions’ and Red dots mark languages with Prepositions. While Yellow ones are with inpositions. Grey ones follow no particular order and Whites one mark languages without adpositions.

  • If you speak Basque or Finnish or Hungarian or Turkish in Europe, Hindi-Urdu postpositions will come naturally to you.
  • If you speak Japanese, Korean, Mongolian, Sinhala, Nepali, Bengali, Pashto, Armenian, Tamil, Telugu, Punjabi, Malayalam, Kannada  & Tibetan in Asia, then Hindi-Urdu postpositions are easier for you 
  • In Africa & south America, there are many smaller languages which use postpositions. 

 

 

 

Source : WALS Online

 

क्या बांग्लादेश में हिन्दी-उर्दू बोली जाती है?

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हाल ही में अख़बारों में बांग्ला देश से जुड़ी एक ख़बर आई कि बांग्लादेश के सिनेमाघरों ने वहाँ के सबसे बड़े फ़िल्म स्टार शकीब ख़ान की फ़िल्मों के बहिष्कार की घोषणा की है। मामला यह था कि पिछले साल लगभग पचास सालों के बाद बांग्लादेश की एक अदालत ने बांग्लादेश में हिन्दी फ़िल्मों के प्रदर्शन पर लगी रोक हटा ली थी। जिसके बाद बांग्लादेशी सेंसर बोर्ड ने बॉलीवुड स्टार सलमान ख़ान की फ़िल्म ’वान्टेड’ को हरी झंडी दिखाई। और यह फ़िल्म जनवरी 2015 के दूसरे हफ़्ते में बड़ी धूमधाम के साथ 45 बांग्लादेशी सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। इस फ़िल्म के प्रदर्शन को रोकने के लिए अभिनेता शकीब ख़ान के नेतृत्व में एक भीड़ ने सिनेमाघरों में तोड़-फोड़ की। इसके बाद सिनेमाघरों ने मिलकर शकीब ख़ान की फ़िल्मों को न दिखाने का फ़ैसला किया।

यह बात अलग है कि बम्बईया फ़िल्मों की बांग्लादेश में जबर्दस्त मांग है, और ज़्यादातर लोग नकल की हुई डीवीडी या वीसीडी पर घर बैठे आराम से फ़िल्में देखते है। सिनेमाघरों में लोगों का जाना  काफ़ी कम हुआ है, और इस वज़ह से सिनेमाघरों के मालिक हिन्दी फ़िल्मों पर से हटी रोक को अपने कारोबार के लिए बहुत अच्छा मानते हैं। ग़ौर फ़रमाएँ तो आप पाएँगे की हिन्दी फ़िल्मों की अधिकांश पायरेटड प्रतियाँ विदेशी वेबाइटों से ही मयस्सर हो रही हैं जिनमें सबसे अधिक लोकप्रिय पाकिस्तानी वेबसाइटें हैं। दूसरी ओर हिन्दी टी.वी. शो और सीरियल बांग्लादेशी घरों में ख़ासे लोकप्रिय हैं। 

इससे से कुछ हटकर एक वाक्या मुझे भी बरास्ता हुआ। कुछ दिनों पहले यहाँ हॉलैण्ड में टहलते हुए सामने से एक भारतीय-सा दिखने वाला जवान जोड़ा दिखाई दिया। मैं उनको देखकर मुस्कुरा दिया, तो वे भी मुस्कुराए।

मैंने पूछा – इंडिया ? वे बोले – नहीं हम लोग बांग्लादेश से हैं।
मैंने कहा – अच्छा, यहाँ कैसे आना हुआ? उस बांग्लादेशी जोड़े ने खाटी हिन्दी-उर्दू में मुझे बताया कि वे लोग यहाँ दो महीनों के लिए आए हुए हैं, और एक जहाज़ बनाने वाली कंपनी में इन्टर्नशीप कर रहे हैं।
मैंने कहा – आप लोग बहुत अच्छी हिन्दी बोलते हैं, आपने हिन्दी कहाँ सीखी?
वे बोले – बम्बईया फ़िल्मों से सीखी, पर हमारी हिन्दी कोई ख़ास नहीं है। यहाँ देखने के लिए कौन-कौन सी जगहे हैं?
मैंने कहा – नहीं आप बहुत अच्छी हिन्दी बोल रहे हैं, और  हमें आप पर नाज़ है। मैं बंगाली आराम से समझ लेता हूँ। और मैंने फ़ौरन कहा – केमोन आछिस, तोमार नाम की?
फिर मैंने उनको विस्तार से यहाँ शहर की देखने लायक चीज़ों का ब्यौरा दिया और हिन्दी में ही दिया।

एक और छोटी मगर अहम बात – मेरे प्रिय गुरु और दोस्त प्रोफ़ेसर भरत सिंह जी ने बताया कि वे जब फ़्रांस की राजधानी पेरिस गए, तब उन्होंने पाया कि वहाँ रहने वाले अधिकांश दक्षिण एशियाई कामगार लोग (यानी पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, भारतीय, नेपाली आदि मेहनतकश लोग) आपस में एक विचित्र प्रकार की भाषा में एक-दूसरे से बात करते हैं। वह ज़ुबान फ़्रांसीसी नहीं बल्की फ़्रांसीसी मिली हुई एक अलग किस्म की हिन्दी-उर्दू है। हिन्दी-उर्दू का यह क्रियोल रूप फ़्रांस में भी अपनी जगह बना रहा है।

अब मेरी समझ में आया कि भाषाएँ सरहदें और संकीर्ण मानसिकताओं से कहीं ऊपर उड़ती हुई लोगों को जोड़ती हैं। लोग मादरी ज़ुबानों का कितना भी विरोध कर लें, भाषाएँ लोगों को मिला कर ही रहेंगी।

Photo Credits: Samaa.Tv

Six Acres and a Third: The Classic Nineteenth-Century Novel about Colonial India

Six Acres & a third

For the last 10 days or so, I have been reading a eloquently written & humorous novel named ‘Six Acres and a Third‘ by Fakir Mohan Senapati (1843-1918).This novel was written by Senapati in the 19th century in Oriya language. I should frankly accept that I had never read anything long (except some short stories) in original or translated from Oriya language literature before I chanced upon this book in the Leiden University’s library. So this is my first experience of any Oriya prose. The novel was originally named ଛ ମାଣ ଆଠ ଗୁଣ୍ଠ [‘Chha Maana Atha Guntha’] and its English translation is published by University of California Press in the year 2005.

Fakir Mohan Senapati

While reading this book, I also came to know that Fakir Mohan Senapati is largely regarded as the father of Oriya nationalism and modern Oriya literature. Set in the villages of 1830’s Odisha, the novel talks about the story of common people and their evil landlord, Ramachandra Mangaraj. The story is written from the eyes of someone who lived and experienced all of these from the ground. The story tells you how poor peasants are cleverly exploited by the landlord and how different communities survive this exploitation. What was puzzling to me is the fact that even in early 19th Century, the petty officers in Police were as much corrupt as we find them nowadays. Another point of interest for me (languages wise) is when the narrator talks about one Zamindar Sheikh Dildar Mian:

Sheikh Karamat Ali used to live in Ara district, and had now moved to Midnapore. Everyone called him Ali Mian, or Mian for short; we will do the same. Ali Mian began his career as a horse trader. He would purchase horses at the west Harihar Chhatar fair and sell them in Bengal and Orissa. Once he sold a horse to the district magistrate of Midanapore. The Sahib was very pleased with it and condescended to inquire about Mian’s business and income. When Mian told him there was not much profit in horse trading, the Sahib, wanting to offer him a job, asked if knew how to read and write. Mian replied,  Huzoor, I know Persia. If you would kindly give me pen and paper, I could show you I can write my full name.

In the past, the Persian language had been held in high favor; it was the language of the court. With a sharp and pitiless pen, God has inscribed a strange fate for India; yesterday the language of the court was Persia, today it is English. Only he knows which language will follow tomorrow. Whichever it may be, we know for certain that Sanskrit lies crushed beneath a rock for ever. English pundits say, ‘Sanskrit is a dead language’.We would go even further , ‘Sanskrit is a language of half dead’.

Few Oriya words/facts I learned from this book are:

Debottara: Land given free of rent to defray the cost of worshiping a deity

Kanugoi: a subordinate revenue officer

Bharanas : a local measure of grains in Odisha

Kahali : a clay pipe

Khai: fried paddy

Ukhuda: fried paddy coated with jaggery

Bauri : an ex-untouchable caste of Odisha, immortalized by one Bauri named Muli by James M Freeman’s Untouchable: An Indian Life History 

Pana: an ex-untouchable caste of Odisha, There are six sub-castes viz-Buna, Ganda,Patra, Sonai, Samal and Jena of Panas.

Khandayats: Khandayats are the martial castes of Orissa

 

The book is also interlaced with several Sanskrit verses and they are beautifully translated as well:

This one is from Guru Gita

Guru-Gita

He who applies the balm of knowledge.

And opens our eyes blinded by the disease of ignorance,

To a guru like him, we bow.