मैं कुछ ज़्यादा बातें करता हूँ – महमूद दरवीश


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अरबी के मशहूर कवि महमूद दरवीश (Mahmoud Darwish) के कविता संग्रह (Unfortunately, It Was Paradise: Selected Poems) से

मैं कुछ ज़्यादा बातें करता हूँ।

मैं कुछ ज़्यादा बातें करता हूँ औरतों और दरख़्तों की छोटी-छोटी समानताओं के बारे में, और दुनिया की तरक्की के बारे में, और उस देश के बारे में जिसकी अपनी कोई पासपोर्ट की मुहर नहीं है।
मैं पूछता हूँ, क्या यह सच है देवियों और सज्जनों, कि आदमी की यह दुनिया सभी इंसानों के लिए बनी है।
जैसा कि आप कहते हैं? तो मेरी छोटी-सी झोंपड़ी कहाँ है और मैं कहाँ हूँ?
सम्मेलन के श्रोता तीन मिनट तक तालियाँ बजाते हैं।
तीन मिनट की आज़ादी और पहचान,
सम्मेलन हमारी वापसी के अधिकार को मानता है, मुर्गियों और घोड़ों की तरह, जैसे कि पत्थर से बना कोई सपना हो।
मैं एक-एक कर सबसे हाथ मिलाता हूँ, अपनी गरदन झुकाता हूँ, और फिर एक चल पड़ता हूँ एक सराब और बारिश का फ़र्क बताने एक दूसरे मुल्क की ओर।
मैं पूछता हूँ, क्या यह सच है देवियों और सज्जनों, कि आदमी की यह दुनिया सभी इंसानों के लिए बनी है।

हिन्दी अनुवाद: अभिषेक अवतंस

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