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(यह लेख मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग की पत्रिका ’ शिक्षायण’ के  वर्ष २०१२ अंक में प्रकाशित)

हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर, सन् 1949 को स्वीकार किया गया। इसके बाद संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में धारा 343 से 352 तक की व्यवस्था की गयी। तब से 14 सितम्बर का दिन पूरे भारत में प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। धारा 342 (1) के अनुसार भारतीय संघ की राजभाषा हिंदी एवं लिपि देवनागरी है। बाद में राजभाषा अधिनियम 1963, राजभाषा नियम 1976 और उनके अंतर्गत समय समय पर राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की ओर से जारी किए गए निर्देशों द्वारा राजभाषा हिंदी के वैधानिक प्रावधानों को परिभाषित किया गया है। राजभाषा हिंदी का प्रयुक्ति-क्षेत्र आमतौर पर अधुनातन मुद्रण की सुविधाओं, शब्दावली मानकीकरण, क्लिष्ट शब्दावली, और हिंदीतर भाषा-भाषी कर्मचारियों के हिंदी भाषा प्रशिक्षण की विभिन्न समस्याओं से अक्रांत रहा है। लेकिन विभिन सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं और निजी समूहों के सहयोग से सूचना क्रांति के इस युग में राजभाषा हिंदी भी अब कंप्यूटर तकनीक के स्कंध पर आरूढ़ होकर नई ऊँचाइयाँ छू रही है। इस लेख में राजभाषा हिंदी के इसी आयाम पर विस्तार से चर्चा होगी।

स्थानीयकरण क्या है?

चीन में सभी लोग जानते हैं कि “माई-डांग-लाओ” क्या है। सच तो यह है कि शायद आपको भी यह पता है कि वह क्या है। कैंटोनीज़ में इसे ‘दांग-लो.” बुलाते हैं। आपको यह जान कर विस्मय नहीं होगा कि “माई-डांग-लाओ”  मैकडॉनल्ड्स (McDonalds- बर्गर नामक व्यंजन बेचने वाली विश्व प्रसिद्ध कंपनी का चीनी भाषा का नाम है।) भारत में हम उसे मैकडॉनल्ड्स ही बुलाते हैं। पर स्थानीयकरण की हवा चीन में भी चली है। “आलू टिक्की बर्गर” और “पनीर सालसा” भारत के सिवा किसी और देश के मैकडॉनल्ड्स आउटलेट में नहीं मिलता। यह स्थानीयकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। साथ ही यह ग्लोकुलिकरण (Globalization + Localization) की भी एक अच्छी मिसाल है।

भूमंडलीकृत हो रही दुनिया की आधुनिक अर्थव्यवस्था में व्यापारिक गतिविधियों के लिए उभर कर आ रहे बाजार के  बहुत व्यापक स्पेक्ट्रम हेतु आपस में प्रतिस्पर्धा है। इस बाजार की जीतने का एक आसान तरीका है: स्थानीयकरण। स्थानीयकरण अपने नए लक्षित उपभोक्ताओं की भाषा में अपनी वकालत करते हुए सामग्री और उत्पाद को प्रस्तुत करता है। स्थानीयकरण का अर्थ सही रूप से सिर्फ भाषा अनुवाद ही नहीं कर देना है बल्कि स्थानीयकरण कई स्तरों पर किया जाता है जैसे स्थानीय अंतर्वस्तु, रीति-रिवाज, संकेत प्रणाली, सॉर्टिंग, सांस्कृतिक मूल्यों व संदर्भों के साथ सौंदर्यानुभूति की दृष्टि से स्थानीयकरण।

पर क्या स्थानीयकरण केवल बाजार के लिए किया जा रहा है?  विश्व की 94 प्रतिशत जनता अंग्रेजी को प्रथम भाषा के रूप में नहीं बोलती। आज के सूचना क्रांति के युग में यह आवश्यक हो गया है कि ज्ञान की गंगा गाँव-गाँव तक बहे। यह कार्य तभी संभव है जब प्रादेशिक व देशीय भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान और सूचनाएँ लोगों तक पहुँच पाएं। हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ती जा रही है। मोबाइल फोन, ए.टी.एम, रेलवे टिकट आरक्षण से लेकर पर्सनल कंप्यूटर/लैपटॉप और मोबाइल तक सूचना प्रौद्योगिकी हमारे काम आ रही है।

आज से कुछ वर्ष पूर्व इन संसाधनों तक केवल अंग्रेजी की जानकारी रखने वाले समाज की ही पहुँच थी परन्तु अब स्थानीयकरण  (लोकलाइजेशन) की बदौलत मध्यप्रदेश का एक छोटा किसान भी ई-चौपाल के जरिए बटन दबाकर मंडी के भाव और कृषि संबंधी सूचनाएँ पता कर रहा है।

दूसरी तरफ हिंदी भारत गणराज्य की राजभाषा भी है। इसका प्रयुक्ति क्षेत्र बहुत व्यापक है। इसके अंतर्गत केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय, विभाग, कार्यालय, निगम, कंपनी, बैंक, आयोग आदि आते हैं। सूचना प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल इन सभी क्षेत्रों में दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। सर्वज्ञात है कि कंप्यूटर ने राजभाषा हिंदी में काम करना सुगम बनाया है।

राजभाषा हिंदी और कंप्यूटर स्थानीयकरण : अब तक क्या हुआ है?

हिंदी में कंप्यूटर स्थानीयकरण का कार्य काफी पहले शुरू हुआ और अब यह आन्दोलन की शक्ल ले चुका है। हिंदी सॉफ्टवेयर लोकलाइजेशन का कार्य सर्वप्रथम सी-डैक (CDAC) द्वारा 90 के दशक में शुरू किया गया था। हिंदी भाषा के लिए कई संगठन काम करते हैं जिसमें सी-डैक, गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग, केन्द्रीय हिंदी संस्थान और अनेकों गैर-सरकारी संगठन जैसे सराय, इंडलिनक्स आदि प्रमुख हैं। इनमें से एक इंडलिनक्स ने भी अपना काम हिंदी से ही शुरू किया। हिंदी के लिए विभिन्न परियोजनाओं को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से सोर्सफोर्ज वेबसाइट पर हिंदी प्रोजेक्ट भी प्रारंभ किया गया है। यहाँ मुख्यत: फेडोरा, ग्नोम, केडीई, मोजिला, और ओपनऑफिस का हिंदी स्थानीयकरण किया जा रहा है। दूसरी ओर दिल्ली स्थित ’सराय’ नामक गैर सरकारी संस्था ने भी हिंदी में कंप्यूटर स्थानीयकरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पुणे स्थित रेड हैट भी कंप्यूटर पर हिंदी को बढ़ावा दे रही है।

हिंदी के बड़े बाज़ार की नब्ज़ को देखते हुए व्यावसायिक रूप में हिंदी में स्थानीयकरण को सबसे अधिक बढ़ावा बृहत साफ्टवेयर संस्था माइक्रोसाफ्ट ने दिया है। माइक्रोसाफ्ट ने अपने साफ्टवेयर उत्पादों से संबंधित सहायक साहित्य तथा मार्गदर्शक सूत्रों को विशेषज्ञों की सहायता से हिंदी में उपलब्ध कराने के प्रयत्न शुरू किए हैं। बहुप्रचलित विंडोज़ विस्टा और विंडोज़ सेवन जैसे आँपरेटिंग सिस्टम के साथ वर्ड, पावर प्वाइंट, एक्सेल, नोटपैड, इंटरनेट एक्स्प्लोरर जैसे प्रमुख साफ्टवेयर उत्पाद अब हिंदी में काम करने की सुविधा देते हैं। लेखन में त्रुटियों को दूर करने के लिए आवश्यक “शब्द-कोश” जैसी सुविधाएँ हिंदी में उपलब्ध है और उनके कार्यान्वयन संबंधी प्रयोग चालू हैं। माइक्रोसाफ्ट का लैंग्वेज इंटरफेस पैक स्थानीयकरण का बेहतरीन उदाहरण है। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने अपनी वेबसाइट (http://rajbhasha.nic.in/) पर राजभाषा हिंदी में काम करने को आसान बनाने के उद्देश्य से हिंदी में कई सॉफ्टवेयर उपकरण उपलब्ध करवाए हैं। जिनमें से निम्नलिखित प्रमुख हैं:

1.         कंप्यूटर की सहायता से प्रबोध, प्रवीण तथा प्राज्ञ स्तर की हिंदी स्वयं सीखने के लिए राजभाषा विभाग ने कंप्यूटर प्रोग्राम (लीला हिंदी प्रबोध, लीला हिंदी प्रवीण, लीला हिंदी प्राज्ञ ) तैयार करवा कर सर्व साधारण द्वारा उसका नि:शुल्क प्रयोग के लिए उसे राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया है।

2.         मंत्र अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद सॉफ्टवेयर प्रशासनिक एवं वित्तिय क्षेत्रों के लिए प्रयोग एवं डाउनलोड हेतु राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया है।

3.         श्रुतलेखन नामक उपकरण हिंदी वाक् (स्पीच) से पाठ (टेक्स्ट) हेतु उपलब्ध करवाया है।

4.         वाचांतर नामक उपकरण अंग्रेजी वाक् (स्पीच) से हिंदी अर्थ अनुवाद हेतु उपलब्ध करवाया है।

5.         सी-डैक पुणे के तकनीकी सहयोग से ई-महाशब्दकोश का निर्माण किया है, जो राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर निशुलक उपलब्ध है।

6.         हिंदी में शब्द संसाधन (word processing) के लिए विशेष रूप से तैयार ई-पुस्तक राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

मोबाइल फोन पर हिंदी समर्थन हेतु निरंतर कार्य चल रहा है। कई सोनी, नोकिया और सैमसंग  जैसी कंपनियों ने मोबाइल पर हिंदी प्रदर्शन, हिंदी टंकण, और हिंदी भाषा में इंटरफेस आदि की सुविधा उपलब्ध करवाई है।

इंटरनेट पर राजभाषा  हिंदी

इंटरनेट पर हिंदी को भारत की वेबदुनिया (http://www.webdunia.com/) नामक वेबसाइट ने सर्वप्रथम स्थान दिया। वेबदुनिया ने हिंदी में में लिखने की सुविधा के साथ हिंदी में मेल, समाचार, ज्योतिष, शिक्षा आदि की सुविधाएं प्रारंभ की। दूसरी ओर इंटरनेट पर विश्व प्रसिद्ध खोज इंजन गूगल और याहू सरीखी कंपनियों ने स्थानीयकरण के माध्यम से हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में अपनी सुविधाएँ देना शुरू किया है। गूगल लैब्स इंडिया ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए कई सुविधाजनक अनुप्रयोग उपलब्ध करवाएँ हैं। जिसमें गूगल का संपादित्र (Input Method Editor), ऑनलाइन लिप्यंतरण सुविधा, हिंदी वर्तनी जाँचक, गूगल ट्रांस्लेट, गूगल बुक्स और हिंदी में ब्लॉगर आदि सुविधाए महत्वपूर्ण हैं। गूगल ट्रांस्लेट ने हिंदी अनुवाद को सरल बना दिया है। इससे समूचे वेबपेजों का सरल हिंदी अनुवाद संभव हो गया है। हिंदी में वेब पृष्ठों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। दैनिक जागरण समाचार समूह के साथ जुड़ कर याहू ने हिंदी खबरों को देश-दुनिया तक पहुँचाया है।

राजभाषा हिंदी और ई-शासन

भारत सरकार की राष्ट्रीय ई-शासन योजना का उद्देश्यय भारत में ई-शासन (E-Governance) की नींव रखना तथा इसकी दीर्घावधिक अभिवृद्धि के लिए प्रेरणा उपलब्ध कराना है। ई- शासन का विकास लगातार प्रशासन के सूक्ष्मतर पहलुओं को लघु रूप देने के लिए किए गए उपायों, जैसे नागरिक केन्द्रित, सेवा उन्मुखीकरण और पारदर्शिता के लिए सरकारी विभागों के कंप्यूटरीकरण से प्रारंभ हुआ है। इस योजना के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र की जानकारियों को इंटरनेट पर सरल, विश्वसनीय पहुंच-संभव बनाने के लिए दूर-दराज के गांवों तक मजबूत देशव्यापी तंत्र को तैयार किया जा रहा है और अभिलेखों का बडे़ पैमाने पर डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। इसका अंतिम लक्ष्य नागरिक सेवाओं को नागरिकों के घरों के अधिक समीप लाना है। इस प्रकरण में राजभाषा हिंदी की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में सरकारी अभिलेख जैसे भूमि, वाहन, कृषि संबंधी जानकारियाँ इंटरनेट पर इस योजना के तहत हिंदी में जनता को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। एक ओर सरकारी प्रतिष्ठानों द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 संबंधी सार्वजनिक सूचनाएँ हिंदी के माध्यम से अपनी वेबसाइटों पर उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया चल रही है। तो दूसरी भारत सरकार के भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) द्वारा नागरिकों के लिए बनाए जा रहे आधार कार्ड में हिंदी का अधिकाधिक इस्तेमाल हो रहा है। आधार 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या है जिसे भा.वि.प.प्रा. सभी निवासियों के लिये जारी कर रहा है। संख्या को केन्द्रीकृत डाटा बेस में संग्रहित किया जा रहा है एवं प्रत्येक व्यक्ति की आधारभूत जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक सूचना – फोटोग्राफ, दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि के साथ लिंक किया जा रही है। ये सभी सूचनाएँ हिंदी माध्यम में उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

निष्कर्षत: यह सत्य है कि वर्तमान भारतीय समाज में राजभाषा हिंदी की भूमिका में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। सरकारी फाइलों और कागज़ी दस्तावेज़ों से निकल कर अब यह आम लोगों के मोबाइल और पर्सनल कंप्यूटरों तक पहुँच रही है। कहा जा सकता है कि राजभाषा हिंदी में सूचना प्रौद्योगिकी और कंपयूटर स्थानीयकरण ने नई उर्जा का संचार किया है। वह दिन दूर नहीं है कि जब राजभाषा हिंदी में सभी नागरिक सेवाएँ और सरकारी काम करना सहज और सुलभ होगा।

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