अंडमान डायरी – पोर्टब्लेयर की एक सुबह


 

नवंबर 2005 का एक दिन। सुबह के साढ़े सात बज रहे हैं। सूरज ऐसे चमक रहा है जैसे दुपहरी का समय भूलकर सुबह-सुबह ही अपनी गर्मी बरसाना चाहता हो। जल्दी-जल्दी नहा-धोकर होकर हमेशा की तरह राजू की चाय की दुकान पर पहुँचा। राजू अपने ससुराल में रहता है। वह अंडमान और निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में तमिलनाडु के किसी गाँव से आया है। और अब अपनी पत्नी के घर के नीचे ही सड़क पर चाय-सिगरेट की दुकान चलाता है। दुकान इतनी ही बड़ी है कि एक साथ बमुश्किल चार आदमी बैठ पाएँ।

 

वनक्कम राजू भाई। क्या हाल है? सब ठीक?

वनक्कम। सब ठीक है अब्बू भाई। चाय पीएगा?

 

हाँ-हाँ पर चाय से पहले मैं नाश्ते में इडली खाना पसंद करूंगा। इडली बची है या खत्म हो गई?

टिपिन मांगता? है ना। एक प्लेट मांगता? (नाश्ते को पोर्टब्लेयर में टीपिन (टिफिन) कहते हैं)

 

मैंने कहा – हाँ राजू भाई जो है दे दीजिए। नारियल की चटनी भी है ना?

सांबर है। चटनी आज जल्दी खतम हो गया। पर हम भी घर से लेके आता। मेरा पत्नी बनाके रखा होगा। आप अबी ये सांबर के साथ खाओ। हम आता।

 

ठीक है तब ले आइए।

 

खाना के लिए कोई प्लेट नहीं है। मोम लगे कागज़ की दो तहों को इस तरह हाथ से मोड़ा गया है कि वह एक छोटी प्लेट की शक्ल अख्तियार कर लेती है। उसी में चार छोटी-छोटी मुलायम इडलियाँ सांबर के साथ परोसी गई है।

ये लो अब्बू भाई चटनी।

 

अरे वाह आप तो बहुत जल्दी आ गए।

खाते-खाते मैंने राजू से पूछ ही डाला कि वह यहाँ पोर्टब्लेयर इतनी दूर कैसे आया।

मेरा माँ-बाप मरने के बाद हम इधर आ गया। पानी का जहाज से। तीन दिन तक चेन्नइ से इधर आने में लगा। आने टाइम मेरा पास सिर्फ एक झोला और एक टावल था। आप जानता है? इधर के बारे में एक स्टोरी है कि इधर का तमिल लोग बस इधर बस एक टावल लेके आया और अपना मेहनत से बड़ा-बड़ा बिजिनेस डाल दिया। अभी ये मुरुगन बेकरी शॉप तो आप जानता ना। वो तमिल आदमी है। वो जब इधर आया तो उसका पास कुछ भी नहीं था। इधर में जितना खाने-पीने का रेस्टोरेंट सब है ना। सब तमिल लोग चलाता है।

 

हाँ-हाँ जानता हूँ। मुरुगन बेकरी तो यहाँ की फेमस दुकान है। फिर आपने यहाँ शादी कैसे की?

 

मेरा बीबी का माँ का बम्बूप्लैट में खेत है। उधर हम काम किया और काए कि उसका कोई बेटा नहीं है। हम उसका बेटी से शादी बना लिया। अब पिचला 7 साल से इधर ही रह रहा है। फिर दो  साल से मेरा सास ने मेरे लिए ये दुकान डाल दिया।

मैंने पूछा – यहाँ और दूसरे लोग क्या-क्या काम करते है?

 देखो अब्बु भाई। तमिल लोग तो सारा मछली का, परचून दुकान और रिस्की धंधा करता। अभी इस रोड में जो दारू का दुकान है ना। वो इलिगल है लेकिन बहुत कमाई है। उसका मालिक तमिल आदमी है। और मलयाली लोग भी बहुत ऊपर जा रहा है। इधर ज्वेलरी का सारा काम वइ लोग के हाथ में है। और सारा फैंसी आइटम जैसे गोल्ड भी वहीं लोग इधर ला के सेल करता है। कपड़ा का पूरा बिजिनेस वइ लोग का हाथ में है।

 

मैंने कहा – पर इधर बंगाली लोग भी बहुत हैं। वो क्या काम करते है?

हा हा हा। बंगाली लोग पॉलिटिक्स करता है। उनका एम.पी है ना अंडमान का। वो लोग इधर साइड ज्यादा नहीं है। वो लोग तो दिगलीपुर और हैवलौक साइड में ज़्यादा रहता है। गौरमिंट जॉब भी उन लोग के पास अधिक है। पर वो लोग ज्यादा बिजिनेस नहीं देखता।

 

मैंने पूछा – ये लोकल लोग कौन है? मैंने सुना है कि कोई लोकल लोग इधर रहते हैं।

ये लोकल लोग यहाँ सबसे पहले से सेटल किया है। देखो अंग्रेज लोग जो क्रिमिनल लोग को इधर ला के सेल्यूलर जेल में डाला ना। उन लोग का औलाद है ये लोग। यहाँ पइले इन लोग के पास बहुत प्रापर्टी था पर ये लोग दारू के चक्कर में सब बेच दिया।

 

मैंने पूछा – क्यूँ लोकल लोग कोई बिजिनेस नहीं करते क्या?

ये लोग बहुत आराम करने वाला लोग है। ये अपना जमीन बेच के अपना पेट भरता है। इन लोग का सब जमीन अब धीरे-धीरे तमिल और दूसरा लोग ले लिया है। लोकल लोग अपने आप फ्रिडम-फाइटर का औलाद बता के गौरमिंट से पइसा भी लेता है। पर कोई-कोई लोकल अच्छा बिजिनेस भी डाला है।

 

मैंने कहा – और कौन रहता है यहाँ अंडमान में?

इधर एक राँची लोग भी रहता है। ये लोग भी भौत टाइम से इधर रहते आ रहा है। ये लोग बहुत डेंजर लोग है। ये लोग भी मेनलैंड से इधर आया है। ज़्यादा औरत इन लोग का पुलिस में भर्ती होता है। पैले अंग्रेज लोग का टाइम में ये लोग इधर एक बुश पुलिस में होता था। बुश पुलिस का काम था जंगल को सफा करना और इधर जो जंगल का लोग रहता था ना, उनको मारना। पर अंग्रेज लोग तो चला गया और इसलिए बुश पुलिस भी बंद कर दिया। ये लोग राँची बस्ती में रहता है। अब भी जंगल का लोग ये राँची लोग को देखके भौत डर जाता है। कभी-कभी तो उन लोग के ऊपर अपना तीर-धनुष से अटैक भी कर देता है। इसलिए राँची लोग भी जंगल साइड कम जाता है।

 

मैंने पूछा – तेलुगु लोग नहीं है इधर?

हैं ना बहुत है इधर। ये लोग भी अपना होटल और चाय-सिगरेट का बिजिनेस बहुत करता है। इन लोग का औरत लोग बहुत मेहनत करने वाला होता है। अभी ये क्रासिंग पर जो चाय का दुकान है ना वो एक तेलुगु औरत चलाता है। अच्छा कमाई करता है।

मैंने कहा – हाथ धोने के लिए पानी कहाँ है राजू भाई। और एक चाय भी बना दीजिए।

पानी उधर बकेट में है ना। चाय अभी बनाता है।

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