Awadhi Language


tulsidas

Awadhi is an Indo-Aryan language spoken in northern India and is grouped under Purvi Hindi Branch of Hindi (hence classified as a variety of Hindi). Awadhi is primarily spoken in Awadh (Oudh) region but it is also spoken outside Awadh e.g. Fatehpur, Allahabad, Jaunpur and Mirzapur districts of Utter Pradesh (UP) state of India. It is also known as Kausali and Bainswadi.  To the east of west of it Kannoji and Bundeli is spoken and towards the east Bhojpuri is used. Indian census of 2001 enumerates 422,048,642 speakers of this language. It is believed that Awadhi has its origin in Ardha Magadhi Prakrut.

Grierson’s Linguistic survey of India provides this brief grammatical description of Awadhi

Awadhi_Grammar

A tentative list of publications on Awadhi language

1.अवधी शब्दकोश – सूर्यप्रकाश दीक्षित व सजीवनलाल यादव, विश्वविद्यालय प्रकाशन, लखनऊ, 1996

2.वाचिक कविता: अवधी – विद्यानिवास मिश्र, भारतीय ज्ञानपीठ, 2005

3.अवधी लोक कथाएँ – जगदीश पीयूष, लोकभारती प्रकाशन, 2004

4.प्रारंभिक अवधी – विश्वनाथ त्रिपाठी, राधाकृष्ण प्रकाशन, 1975

5.अवधी का विकास – बाबूराम सक्सेना, हिन्दूस्तान एकेडेमी, इलाहाबाद, 1972

6.अवधी बृहत लोकोक्ति कोश – कमला शुक्ल, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ, 2002

7.अवधी लोकगीत: समीक्षात्मक अध्ययन – विद्याविंदू सिंह, परिमल प्रकाशन, 1983

8.अवधी लोकगीत और परम्परा – इन्दूप्रकाश पाण्डेय, प्रवीण प्रकाशन, दिल्ली, 1988

9.लोकगीतों में राम-कथा : अवधी – किरण मराली, साहित्य भवन, इलाहाबाद 1986

10.अवधी का विकासबाबूरामसक्सेना, हिन्दूस्तानीअकादमी, इलाहाबाद, 1972

11.Evolution of Awadhi- Baburam Saksena, Motilal Banarsidas Publishers, 1971

12.अवधीकोशरामज्ञद्विवेदी, हिन्दूस्तानीअकादमी, इलाहाबाद, 1955

13.पूर्वी अवधी: ग्राम्यशब्दावलीआत्मारामत्रिपाठी, आलोकप्रकाशन, इलाहाबाद, 2007

14.अवधी शब्द संपदाहरदेवबाहरी, भारतीप्रेस, इलाहाबाद, 1982

1.अवधी शब्दकोश – सूर्यप्रकाश दीक्षित व सजीवनलाल यादव, विश्वविद्यालय प्रकाशन, लखनऊ, 1996

2.वाचिक कविता: अवधी – विद्यानिवास मिश्र, भारतीय ज्ञानपीठ, 2005

3.अवधी लोक कथाएँ – जगदीश पीयूष, लोकभारती प्रकाशन, 2004

4.प्रारंभिक अवधी – विश्वनाथ त्रिपाठी, राधाकृष्ण प्रकाशन, ?

5.अवधी का विकास – बाबूराम सक्सेना, हिन्दूस्तान एकेडेमी, इलाहाबाद, 1972

6.अवधी बृहत लोकोक्ति कोश – कमला शुक्ल, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ, 2002

7.अवधी लोकगीत: समीक्षात्मक अध्ययन – विद्याविंदू सिंह, परिमल प्रकाशन, 1983

8.अवधी लोकगीत और परम्परा – इन्दूप्रकाश पाण्डेय, प्रवीण प्रकाशन, दिल्ली, 1988

9.लोकगीतों में राम-कथा : अवधी – किरण मराली, साहित्य भवन, 1986

10.अवधीकाविकासबाबूरामसक्सेना, हिन्दूस्तानीअकादमी, इलाहाबाद, 1972

11.Evolution of Awadhi- Baburam Saksena, Motilal Banarsidas Publishers, 1971

12.अवधीकोशरामज्ञद्विवेदी, हिन्दूस्तानीअकादमी, इलाहाबाद, 1955

13.पूर्वीअवधी: ग्राम्यशब्दावलीआत्मारामत्रिपाठी, आलोकप्रकाशन, इलाहाबाद, 2007

14.अवधीशब्दसंपदाहरदेवबाहरी, भारतीप्रेस, इलाहाबाद, 1982

15.प्रारंभिकअवधीविश्वनाथत्रिपाठी, राधाकृष्णप्रकाशन, दिल्ली, 1975

6 thoughts on “Awadhi Language

  1. Dear Sir,

    This is not a comment but a question. Do you know if there is any extant Buddhist literature in Awadhi ?

    With regards,

    J.Huynen

  2. हमें पूर्वांचल नहीं अवध चाहिए… जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश के चार खंड होने वाले है॥ उससे यह मालुम होने लगा है। की उत्तर प्रदेश के टुकड़े न हो तो अच्छा होगा। जैसे की आज सुबह जब मैने अखबार पढ़ा तो उसमे लिखा था की इलाहबाद ,प्रतापगढ़,फ़तेह पुर ये सब पूर्वांचल में आयेगे ये बात मेरी समझ में नहीं आ रही है। क्यों की इलाहबाद ,फतेहपुर। प्रतापगढ़, इन सब की बोलिया अवधी है । इस लिए इन जिलो को अवध में सम्लित किया जाना चाहिए। वैसे जब से थोड़ा भोजपुरी का उत्थान होने लगा है हमारी अवधी भाषा विलुप्त के कगार में आके खड़ी है। क्यों की हमारे लोगो के जिलो में अभूत से कलाकार,खिलाडी है। न उनको अभी तवज्जो मिल रही है । और न बाद में मिलने की संभावना रहेगी। क्यों वैसे हम गीत लिखते है अवधी और हिंदी में लेकिन मै १० साल से कोशिस कर रहा की कोई सिंगर मेरा गीत गाये। लेकिन हमें अधिकतर यही कहा जाता है। की हम अवधी की जगह भोजपुरी के लिखे वैसे ये तीनो जिले गरीब रेखा नीचे ही आते होगे। अगर ये पूर्वांचल में सम्मलित किये गए तो निश्चित ही ..इअके दिन बुरे आ जायेगे। इस सब से निवेदन है की आप लोग कोशिश करिए की अगर उत्तर प्रदेश कर बँटवारा होता है । तो हमें अवध चाहिए… वैसे भी हम लोग अवध के वासी है । और अवध में ही रहना पसंद करेगे। वैसे पहले भी हमारे यहाँ के राजाओ का नाम अवध या अवधेश । और अभी भी हम लोग उत्तर प्रदेश के बाद भी अवध likhate hai…

    धन्यवाद।

  3. Awadh??? Kyon chahiye apko Awadh? South, East, West ke states ko Language ke basis par banaya gaya?
    Awadhi nam ki language????
    Bharat ke samvidhan me yeh language hai kya?

  4. I think there is a serious flaw in the way Britishers reclassified Indian languages, which unfortunately has been taken over unquestioningly by the Indians, overriding the original classification of North Indian languages by the natives.
    In particular, there is a serious problem in the way North Indian languages have been reclassified between “western Hindi” and “Eastern Hindi.” As well as in the way Punjabi has been included in western Hindi and Eastern Hindi has been totally considered a different language from western Hindi, whereas Punjabi is considered a part of it. This is quite broken from reality. In reality, the dialects of North India from Punjabi to Bengali form a continuum — especially from Punjabi to Bihari. Furthermore, there is no geographical or political barrier between areas that speak “Western Hindi” from those that speak “Eastern Hindi” to suggest that they would be so drastically different from each other, as is claimed by the Britishers … and there is nothing to suggest why Brij Bhasha (Western Hindi) would be closer to Punjabi than to Awadhi (classified as Eastern Hindi by the Britishers), which is its neighbour. Furthermore, there are innumerous similarities between Brij Bhasha and Awadhi, esp. Old Awadhi (of Tulsidas), which are almost similar.

  5. THE CONSPIRACY TO DIVIDE UP WILL NEVER BE TOLERATED.RATER UP SHOULD REMAIN UNITED UNDER THE NEW NAME OF Vishnu Pradesh (KRISHNA, RAM AND LORD BUDDHA TOOK BIRTH HERE, ALL ARE INCARNATION OF VISHNU).

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