भाषा और लिंग के अंत:संबंध पर वैज्ञानिक विमर्श का मसला बहुत पुराना नहीं है। पिछ्ले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में एक नई बहस की शुरुवात हुई है। इस विषय पर हिंदी में लिखे गए अधिकांश आलेख विश्व की अन्य भाषाओं पर हो रहे इसी तरह के कार्य से नावाक़िफ़ हैं। साथ ही हिंदी में उपलब्ध भाषाविज्ञान विषयक सामाग्री प्राय: बासी पड़ गई है और नई सदी के भाषावैज्ञानिक विमर्श से लगभग अछूती है। इन्हीकमियों की भरपाई करने के मकसद से केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की शोध पत्रिकागवेषणाने एक नई परम्परा की शुरुवात करते हुए पत्रिका के अंक-86 में सुप्रसिद्ध नृविज्ञानी सूज़न गेल का ‘Language and Gender : An Anthropological Review’ (1996) शीर्षक बहुचर्चित शोधआलेख का हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया था। उक्त लेख के हिंदी अनुवाद (भाषा, लिंग और सत्ता) को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए PDF लिंक पर क्लिक करें।

bhasha-ling aur Satta

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